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लखीमपुर खीरी हिंसा: गवाह को धमकी मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा को राहत

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के गवाह बलजिंदर सिंह को धमकाने के आरोप में यूपी पुलिस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में दोनों का नाम नहीं है.

Lakhimpur Kheri Case Ashish Mishra & Ajay Mishra Not Named In Witness Threat Case
Edited by Vaibhav Gupta

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि गवाहों को धमकाने के मामले में आशीष मिश्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा का चार्जशीट में नाम नहीं है. मामले की सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. कोर्ट ने वकील के बयानों को रिकॉर्ड पर ले लिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने शिकायतकर्ता से दो सप्ताह में अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने को कहा है.

अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच रिपोर्ट, जिसमें कहा गया है कि गवाह को डराने-धमकाने के आरोप वाली एफआईआर की जांच पूरी हो गई है और आशीष मिश्रा के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमनदीप सिंह के खिलाफ चार्जशीट फाइल कर दी गई है. जिसपर कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया है. हालांकि अजय मिश्रा, आशीष मिश्रा और अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच में उनके शामिल होने के कोई प्रमाण नहीं मिला है.

कोर्ट ने शिकायतकर्ता को राज्य पुलिस द्वारा दायर स्टेट्स रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. गवाहों को डराने-धमकाने के आरोप में यूपी पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में एफआईआर दर्ज की थी. यह तब हुआ जब सुप्रीम कोर्ट बलजिंदर सिंह की शिकायत पर कार्रवाई न करने के लिए पुलिस की आलोचना की थी.

क्या है आरोप?

बलजिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें अपना बयान वापस लेने की धमकी दी गई. पुलिस की इस दलील को मानने से इनकार करते हुए कि गवाह अपना बयान दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आया, कोर्ट ने एक वरिष्ठ अधिकारी को शिकायतकर्ता के पास जाकर उसका बयान दर्ज करने का निर्देश दिया. बाद में लखीमपुर के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने पंजाब के मुक्तसर में शिकायतकर्ता का पता लगाया और उसका बयान दर्ज किया.

इसके बाद भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 195 a, धारा 506 और 120 b के तहत अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज की गई. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय आशीष मिश्रा पर कई शर्ते लगा रखा है. आशीष मिश्रा को रिहाई से एक सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश छोड़ना होगा. वह यूपी, दिल्ली या दिल्ली एनसीआर में नही रह सकते है. उन्हें अदालत को अपने स्थान के बारे में सूचित करना होगा, कोर्ट ने पासपोर्ट सरेंडर करने, गवाहों को प्रभावित ना करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नही करने का आदेश दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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