सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. कोर्ट ने आशीष मिश्रा को कुछ शर्तों के साथ 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक घर रहने की अनुमति दे दिया है. आशीष मिश्रा को 1 जनवरी को लखीमपुर खीरी छोड़ना होगा. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है.
गवाहों को धमकाने की जांच के आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि उनकी बेटी 12 वी क्लास में पड़ती है. उसका परीक्षा है. वह बेटी के साथ रहना चाहते हैं. जिसके बाद कोर्ट ने अनुमति दे दी है. इससे पहले कोर्ट ने दीवाली में घर जाने की अनुमति दे दिया था.
कोर्ट ने गवाहों को धमकाने और प्रभावित करने के आरोपों की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी से कराने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि एक गवाह पर दबाव डालने की शिकायत की प्राथमिक जांच में दबाव की बात सामने आने के बाद एफआईआर दर्ज किया जा चुका है.
आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों का उल्लंघन
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील से कहा था कि जमानत शर्तो का सख्ती से पालन करना होगा. वही पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को मिश्रा को जमानत दी थी.
साथ ही जमानत की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया था और उन्हें तय तारीख से केवल एक दिन पहले अपने मुकदमे के स्थान पर जाने की अनुमति दी थी. लेकिन वह एक अक्टूबर को (लखीमपुर खीरी) ऐसे गए जैसे दो अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश वाले दिन सुनवाई हो. जबकि अगले दिन अदालत बंद थी और उन्होंने एक अक्टूबर को एक विशाल सार्वजनिक रैली को संबोधित किया.
-भारत एक्सप्रेस
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