सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी का नाम और सिंबल फ्रीज करने को लंबित अर्जी पर चार सप्ताह में दलीलें पूरी करने का निर्देश दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग पार्टियों की दलीलें पूरी होने के तीन महीने के भीतर इस मामले पर फैसला देने को कहा है.
कोर्ट ने यह आदेश पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है. पिछली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से पूछा था कि दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में दायर याचिका का निपटारा कितने समय में करेंगे. कोर्ट ने चुनाव आयोग के वकील से आयोग से निर्देश लेकर सूचित करने का निर्देश दिया था.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि मेरे पास कोई उपचार नहीं है अब जबकि उपचुनाव का शिड्यूल तय हो गया तो ऐसे में मैं कहां जाऊंगा. उन्होंने कहा था कि वो उपचुनाव पर रोक लगाने की मांग नही कर रहे है. इसपर जस्टिस बागची ने कहा था कि यह एक अंतरिम आदेश है. जबकि जस्टिस वी मोहना ने कहा था कि यह दोनों पक्षों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने किया है.
सिब्बल ने कोर्ट से कहा था कि अगर इसे आप अनुमति देंगे तो हरेक मामले में ऐसा होगा. इसपर जस्टिस मोहना ने कहा था कि हम फाइनल आदेश होने पर ही आगे जा सकते है. ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर रोक लगाने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
टीएमसी की याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग
इससे पहले टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि कार्यवाही जून में शुरू हुई थी और जुलाई में जवाब दाखिल किया गया था, लेकिन चुनाव का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद चुनाव चिन्ह को फ्रिज कर दिया गया. सिब्बल ने कहा था ये क्या हो रहा है? हमें समझ नहीं आ रहा कि ऐसा कैसे हुआ. इसलिए मैं चाहता हूं कि इस पर तुरंत सुनवाई हो. हम इस सब पर रोक चाहते है. ऐसा कैसे हो सकता है? इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि अभी बहस न करें. दूसरी तरफ से भी बहस होगी. इसे सूचीबद्ध होने दें. सिब्बल ने कहा था कि चुनाव आयोग नए-नए रिकॉर्ड बना रहा है.
चुनाव आयोग के फैसले को ममता बनर्जी ने कोर्ट में दी चुनौती
ममता बनर्जी ने कोर्ट में टीएमसी के सिंबल को लेकर चुनाव आयोग के दिये फैसलों को चुनौती दी है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी को पार्टी का नाम और सिंबल के इस्तेमाल करने पर रोक लगा दिया है. आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए टीएमसी के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को फुटबॉल खिलाड़ी’ जबकि अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है. जिसके बाद ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह अंतरिम व्यवस्था को समझौते के तौर पर स्वीकार नही करेंगी और वह पार्टी की असली पहचान एवं चुनाव चिन्ह वापस पाने के लिए संघर्ष करेंगी.
ममता ने तृणमूल कांग्रेस के साथ अपने लंबे राजनीतिक जुड़ाव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को नहीं छोड़ सकती, क्योंकि यह वह पार्टी है जिसे उन्होंने 39 साल के संघर्ष, त्याग और राजीनीतिक लड़ाइयों के बाद बनाया है. टीएमसी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट मौजूद है और दोनों ही असली टीएमसी होने का दावा कर रहे है. आयोग ने यह कदम इलेक्शन ऑर्डर 1968 के पैरा 15 के तहत यह अंतरिम कदम उठाया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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