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सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि, 2 मिनट रखा गया मौन

स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीश, कर्मचारी और विजिटर ने 2 मिनट का मौन रखा. यह मौन भारत के उन वीर नागरिकों को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए रखा गया है. यह मौन भारत के उन वीर नागरिकों को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए रखा गया है, जिन्होंने देश की आजादी और स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का योगदान दिया.

Freedom Fighters

शहीद दिवस पर सुप्रीम कोर्ट में 2 मिनट का मौन

Martyrs Day 2026: स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीश, कर्मचारी और विजिटर ने 2 मिनट का मौन रखा. यह मौन भारत के उन वीर नागरिकों को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए रखा गया है, जिन्होंने देश की आजादी और स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का योगदान दिया.

स्वतंत्रता सेनानियों की याद में 2 मिनट का मौन

मौन के दौरान कोर्ट परिसर में सभी लोगों ने स्वतंत्रता सेनानियों की याद में कोई कार्यवाही नहीं की. जानकारों की माने तो यह पहल न केवल स्वतंत्रता सेनानियों की याद को सम्मान देने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नागरिकों और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक संदेश भी देती हैं. इससे यह याद दिलाया जाता है कि स्वतंत्रता के लिए कई लोगों ने अत्यधिक संघर्ष और बलिदान दिए.

हीद दिवस मानने का उद्देश्य

30 जनवरी को शहीद दिवस मानने का उद्देश्य केवल महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि उन वीरों को याद करना है, जिन्होंने देश की आजादी, एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया. महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चल कर देश को स्वतंत्रता दिलाई. उनकी हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं थी, बल्कि मानवीय मूल्यों पर हमला था. यही कारण है कि यह दिन राष्ट्रीय शोक और स्मरण का दिन बना.

जब महात्मा गांधी पर हुआ था हमला

30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला हाउस में महात्मा गांधी पर हमला हुआ था. हमलावर नाथूराम गोडसे ने उन्हें गोली मार दी थी. गांधी जी की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.

महात्मा गांधी सत्य, अहिंसा और भाईचारे के सबसे बड़े प्रतीक माने जाते हैं. बिड़ला हाउस का निर्माण मशहूर उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला ने साल 1928 में करवाया था और उनके परिवार का दिल्ली स्थित निवास था. यह लगभग सात एकड़ में फैला हुआ है. इसमें 12 बेडरूम का बंगला और बाग हुआ करते थे. हालांकि, वर्ष 1971 में सरकार ने बिड़ला परिवार से यह बंगला खरीद लिया.

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-भारत एक्सप्रेस

Edited by: Shubhra Rai (Intern)



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