इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को इस साल कर्नाटक के मैसूर दशहरा महोत्सव उद्धघाटन के लिए दिए गए आमंत्रण को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है. कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई है. जिसपर कोर्ट 19 सितंबर को सुनवाई करेगा.
मैसूरु जिला प्रशासन ने तीन सितंबर को आधिकारिक तौर पर बानू मुश्ताक को आमंत्रित किया था. कर्नाटक के हासन की रहने वाली 77 वर्षीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक 22 सितंबर 2025 को इस उत्सव की शुरुआत करेंगी. विजयदशमी कार्यक्रम 2 अक्टूबर को निर्धारित है. इस फैसले का भाजपा और कुछ अन्य संगठनों ने विरोध किया है.
मैसूर दशहरा के उद्घाटन में बानू मुश्ताक को बुलाने का विरोध
कर्नाटक के मैसूर शहर में हर साल मनाया जाता है. यह राज्य का सबसे बड़ा सांस्कृतिक पर्व है, जिसे नाडा हब्बा यानी राज्य उत्सव भी कहा जाता है. ये उत्सव देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित होता है. मान्यता यह है कि उन्होंने राक्षस राजा महिषासुर का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाई थी.
मामले में विवाद तब और बढ़ गया, जब बानू मुश्ताक का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कन्नड़ भाषा की देवी भुवनेश्वरी की पूजा को लेकर आपत्ति जताई थी. उनके बयान को कुछ लोगों ने हिंदू संस्कृति विरोधी बताया.
बता दें कि दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में दुनिया भर से लगभग 50 लाख लोग कर्नाटक की विरासत राजधानी मैसूर में दशहरा मनाने आते है. इसको लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि मैसूर दशहरा का उद्धघाटन करने के लिए बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने का विरोध केवल कुछ लोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों के साथ सभी हिंदू नहीं हैं.
ये भी पढ़ें- नाबालिग लड़के के अपहरण के मामले में तमिलनाडू के केवी कुप्पम के विधायक जगन मूर्ति को मिली नियमित जमानत
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
