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‘नियम ताक पर रखकर बनाए अफसर!’ ओडिशा DGP लिस्ट में हेरफेर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एमिकस क्यूरी ने खोली पोल

Supreme Court Case: ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता और एमिकस क्यूरी ने आरोप लगाया कि प्रकाश सिंह मामले में शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर पात्रता सूची में फेरबदल की कोशिश की गई है.

ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति में नियमों की अनदेखी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई.

(सुप्रीम कोर्ट)

Edited by Shubhra Rai

Supreme Court Case: सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि डीजीपी को लेकर जो लिस्ट तैयार किया गया है, वह कानून के दायरे में की गई है. जबकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश का पालन नहीं किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन नहीं हुआ

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. मामले में 23 सितंबर को भी सुनवाई जारी रहेगी. पिछली सुनवाई में एमिकस क्यूरी ने गंभीर सवाल उठाया था. खासकर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुशांत कुमार नाथ को प्रक्रिया से बाहर रखने, इंटिग्रिटी सर्टिफिकेट पर विचार नहीं किए जाने और कुछ अधिकारियों को अचानक प्रमोशन देकर शॉर्टलिस्ट में शामिल करने पर यह सवाल उठाया है. मामले की सुनवाई के दौरान राजू रामचंद्रन और डॉक्टर चारु माथुर ने कोर्ट को बताया था कि प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पदों की अनुमति देने से इनकार किया

एमिकस क्यूरी ने कोर्ट में दिए गए अपनी रिपोर्ट में ओडिशा सरकार की उस कार्रवाई पर चिंता जताई थी, जिसमें डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले अस्थायी एक्स कैडर डीजीपी पद बनाए गए. इससे दो अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजीपी) स्तर के अधिकारियों को डीजीपी पद के चयन के लिए पात्रता हासिल हो गई. एमिकस क्यूरी के रिपोर्ट के मुताबिक यह कदम 14 मई 2026 को यूपीएससी को मूल पात्रता सूची भेजे जाने के बाद उठाया गया था. एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को यह भी बताया था कि इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऐसे पदों की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में अपने रुख में बदलाव करते हुए स्पष्ट कारण नहीं आने पर सवाल उठाया था.

संजीब पांडा की सेवा अवधि को लेकर भी सवाल उठे

एमिकस क्यूरी ने सिफारिश की निष्पक्षता बनाए रखने और चयन प्रक्रिया में किसी तरह की हेरफेर की आशंका को दूर करने के लिए 14 मई की मूल पात्रता सूची को ही एम्पाइनलमेंट कमेटी के सामने विचार के लिए रखने को कहा है. एमिकस क्यूरी ने संजीब पांडा की सेवा अवधि को लेकर भी सवाल उठाये है. एमिकस क्यूरी ने कहा कि राज्य सरकार के एक पत्र में पांडा की सेवा अवधि 32 वर्ष बताई गई है, जबकि पात्रता सूची में संबंधित तारीख तक उनकी सेवा अवधि 31 वर्ष से कम दिखाई गई है. एमिकस क्यूरी ने राज्य सरकार से इस अंतर को स्पष्ट करने को कहा है. ताकि चयन प्रक्रिया में रिकॉर्ड की सटीकता और पारदर्शिता बनी रहे.

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-भारत एक्सप्रेस



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