अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर कर चुनावी वादों के वित्तीय प्रभाव, मुफ्त की रेवड़ियों पर रोक और घोषणापत्रों के लिए एक निश्चित प्रारूप लागू करने की मांग की है. (PC: भारत एक्सप्रेस)
सुप्रीम कोर्ट ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. लेकिन इसे अभी तक रिकॉर्ड पर नही लिया गया है.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने ओडिशा सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया था. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच सुनवाई कर रही है. दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओडिशा सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है और डीजीपी पद के लिए अपात्र अधिकारियों को चयन पैनल में शामिल करने का प्रयास कर रही है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यूपीएससी को ओडिशा के डीजीपी के सेलेक्शन को 18 अगस्त तक फाइनल न करने का निर्देश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले अधिकारी को प्रमोशन देने पर सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले ही एक अधिकारी को प्रमोशन दिया गया, ताकि उसे यूपीएससी को भेजे जाने वाले पैनल में शामिल किया जा सके. वही ओडिशा सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने नियमों के किसी भी उल्लंघन से इनकार कर दिया था और सर्विस से जुड़े विवाद में जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया था.
कोर्ट ने भी इसकी स्वीकार्यता पर संदेह जताया है. इसके बाद कोर्ट ने प्रकाश सिंह बादल मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन से राय व्यक्त करने को कहा था. इसपर एमिकस क्यूरी ने दायर याचिका का समर्थन करते हुए कहा था कि सेलेक्शन प्रोसेस प्रकाश सिंह मामले की गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा है. जिसके बाद कोर्ट ने नियुक्ति को हो रही मीटिंग को टालने का निर्देश दिया था.
चिदंबरम ने आरोप लगाया था कि राज्य ने संघ लोक सेवा आयोग को भेजे गए अधिकारियों के पैनल को वापस ले लिया है और अब एक नई सूची तैयार कर रहा है. चिदंबरम ने आरोप लगाया था कि ओडिशा सरकार ने डीजीपी चयन के लिए पहले यूपीएससी को अधिकारियों की सूची भेजी थी.
यूपीएससी की एम्पैनलमेंट कमेटी को सात अगस्त को इस सूची में से तीन अधिकारियों का पैनल तैयार करना था. लेकिन राज्य सरकार ने सूची वापस ले ली. इसके बाद नए पैनल की कवायद शुरू हुई.
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-भारत एक्सप्रेस
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