सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने गंभीर सवाल उठाए है. एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने चयन एम्पाइनलमेंट की प्रकिया को लेकर यह सवाल उठाया है. खासकर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुशांत कुमार नाथ को प्रक्रिया से बाहर रखने, इंटिग्रिटी सर्टिफिकेट पर विचार नहीं किए जाने और कुछ अधिकारियों को अचानक प्रमोशन देकर शॉर्टलिस्ट में शामिल करने पर यह सवाल उठाया है.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी .मोहना की बेंच ने एमिकस क्यूरी की आपत्तियों के बाद सुनवाई को अगले सप्ताह के लिए टाल दिया है.
कोर्ट के निर्देशों का नहीं हुआ पालन
मामले की सुनवाई के दौरान राजू रामचंद्रन और डॉक्टर चारु माथुर ने कोर्ट को बताया कि प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया है.
एमिकस क्यूरी ने कोर्ट में दिए गए अपनी रिपोर्ट में ओडिशा सरकार की उस कार्रवाई पर चिंता जताई है, जिसमें डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले अस्थायी एक्स कैडर डीजीपी पद बनाए गए. इससे दो अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजीपी) स्तर के अधिकारियों को डीजीपी पद के चयन के लिए पात्रता हासिल हो गई.
कारण न होने पर उठे सवाल
एमिकस क्यूरी के रिपोर्ट के मुताबिक यह कदम 14 मई 2026 को यूपीएससी को मूल पात्रता सूची भेजे जाने के बाद उठाया गया था. एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को यह भी बताया कि इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऐसे पदों की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में अपने रुख में बदलाव करते हुए स्पष्ट कारण नहीं होने पर सवाल उठाया था.
उन्होंने ने सिफारिश की निष्पक्षता बनाए रखने और चयन प्रक्रिया में किसी तरह की हेरफेर की आशंका को दूर करने के लिए 14 मई की मूल पात्रता सूची को ही एम्पाइनलमेंट कमेटी के सामने विचार के लिए रखने को कहा है. एमिकस क्यूरी ने संजीब पांडा की सेवा अवधि को लेकर भी सवाल उठाये है.
राज्य सरकार को अंतर स्पष्ट करने का निर्देश
एमिकस क्यूरी ने कहा कि राज्य सरकार के एक पत्र में पांडा की सेवा अवधि 32 वर्ष बताई गई है, जबकि पात्रता सूची में संबंधित तारीख तक उनकी सेवा अवधि 31 वर्ष से कम दिखाई गई है. एमिकस क्यूरी ने राज्य सरकार से इस अंतर को स्पष्ट करने को कहा है. ताकि चयन प्रक्रिया में रिकॉर्ड की सटीकता और पारदर्शिता बनी रहे.
उन्होंने एक पात्र डीजीपी स्तर के अधिकारी का इंटिग्रिटी सर्टिफिकेट रोके जाने के मामले में भी ओडिशा सरकार से जवाब मांगे जाने की.सिफारिश की है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास प्रमाणपत्र रोकने का अधिकार हो सकता है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि ऐसा फैसला ठोस कारणों और संबंधित तथ्यों पर उचित विचार करने के बाद लिया गया या नहीं. खास तौर पर तब, जब संबंधित अधिकारी डीजीपी के पद पर बना हुआ है.
मूल पात्रता सूची पर विचार
एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने कहा कि एमएचए (MHA) के रुख में कथित असंगति और शुरुआती प्रस्ताव भेजे जाने के बाद दो अधिकारियों को चयन के दायरे में लाने के स्पष्ट कारण नहीं बताए जाने की स्थिति में एम्पाइनलमेंट कमेटी को केवल 14 मई 2026 की मूल पात्रता सूची पर विचार करना चाहिए.
उनके अनुसार अगस्त की अपडेटेड सूची, जिसमें उसी दिन किए गए प्रमोशन के बाद अधिकारियों के नाम शमिल किए जाने को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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