मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपी जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के प्रबंधन निदेशक मनोज गौड़ को पटियाला हाउस कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने मनोज गौड़ की ओर से दायर नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. इससे पहले हाई कोर्ट ने चार दिन के लिए अंतरिम जमानत की अवधि को बढ़ा दिया है. निचली अदालत ने मनोज गौड़ को पांच-पांच लाख रुपए के दो निजी मुचलकों पर अंतरिम जमानत दे दिया था. मनोज गौड़ की माँ की तबियत खराब है. जिसके लिए गौड़ को यह अंतरिम जमानत मिली है.
निचली अदालत में सुनवाई के दौरान गौड़ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया था कि उनकी मां उम्रदराज हैं और उन्हें डायलिसिस की जरूरत है. साथ ही वह कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित है. मनोज गौड़ मां की देखरेख करना चाहते हैं. जिसका ईडी की ओर से पेश वकील ने इसका विरोध किया. ईडी के वकील ने कहा कि उनकी देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य भी है.
61 साल के मनोज गौड़ की हिरासत पर सवाल
दायर याचिका में इस बात पर जोर दिया गया था कि गौड़ 61 साल के है और उनका 30 साल का मेडिकल इतिहास है. इसमें कहा गया है कि गौड़ की हिरासत, आठ साल पुराने ईडी मामले, दस्तावेजी आरोपों, व्यक्तिगत लाभ की अनुपस्थिति, कंपनियों पर नियंत्रण के वैधानिक विनिवेश, और गंभीर मेडिकल बीमारियों को देखते हुए, बहुत ज्यादा अनुपातहीन है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है.
ईडी का दावा है कि कंपनी और उससे जुड़ी फर्मों ने करीब 13000 करोड़ रुपए के फंड का गलत इस्तेमाल किया. ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के इस केस की जांच शुरू की थी. मई 2025 में ईडी ने दिल्ली नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई समेत करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी की थी.
मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को वर्ष 2018 के एक मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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