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नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट ने ईडी द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर फैसला रखा सुरक्षित

शनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यु कोर्ट ने ईडी द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया है.

Edited by Vaibhav Gupta

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले (National Herald money laundering case) में दिल्ली की राऊज एवेन्यु कोर्ट ने ईडी द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया है. विशेष न्यायाधीश डॉक्टर विशाल गोगने ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

कोर्ट 29 नवंबर को तय करेगा कि इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य को समन जारी किया जाए या नहीं. ईडी ने चार्जशीट में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है.

सोनिया-राहुल का केस से क्या लेना देना?- कोर्ट

यह मामला 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड (National Herald) अखबार की मूल प्रकाशन कंपनी एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड की संपत्तियों को अनुचित तरीके से हथियाने की साजिश रची. ईडी ने अप्रैल 2025 में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन लिमिटेड और डॉकटेक्स मर्चेडाइज प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया.

कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से 4 जुलाई 2014 को ईडी के पास दर्ज की गई शिकायत की कॉपी और 30 जून 2021 को ईडी द्वारा दर्ज ईसीआर की कॉपी दाखिल करने का निर्देश दिया था. इससे पहले कोर्ट ने जांच अधिकारी से पूछा था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी का इस केस से क्या लेना देना है. मामले की सुनवाई के दौरान ईडी का कहना था कि जिन लोगों ने कांग्रेस को दान दिया उनके साथ धोखाधड़ी की गई है.

ED का यंग इंडियन संस्था पर आरोप

मामले की सुनवाई के दौरान ईडी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि यंग इंडियन संस्था मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त है. ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा था कि जो भी यंग इंडियन को डोनेशन देता था, उसे चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया जाता था. ईडी की ओर से यह भी कहा गया था चैरिटी के नाम पर कुछ नही हुआ, चैरिटेबल कार्य कभी शुरू ही नहीं हुआ.

एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि सिर्फ नाम के लिए यह संस्था चलाई गई. ईडी ने कहा था बिना कोई निवेश किए करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया. ईडी ने यह भी कहा था कि बिना एक रुपया लगाए 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि एजेएल के अधिग्रहण के लिए 50 लाख रुपए डोटेक्स नामक कंपनी से मिले थे.

ये भी पढ़ें: अहमदाबाद एयर इंडिया हादसा मामले की न्यायिक जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस



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