दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की है. रानी कपूर ने संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बोर्ड मीटिंग और ट्रस्ट के हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने प्रिया सचदेव पर ट्रस्ट में दखल का आरोप लगाया और 18 मई को होने जा रही बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग की है. यह बैठक रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से बुलाई गई है, जिसके पास विवादित पारिवारिक संपत्ति का बड़ा हिस्सा है. दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस बैठक के जरिए बोर्ड में नए निदेशकों की नियुक्ति की योजना है.
‘महाभारत भी छोटा लगेगा’- जस्टिस पारदीवाला
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ रानी कपूर की ओर से दायर नई याचिका पर 14 मई को सुनवाई करेगी. सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘हम एक ऐसे मैदान में प्रवेश कर चुके हैं, जहां महाभारत भी छोटा लगेगा, हम इस पर विचार करेंगे.’ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 7 मई को मध्यस्थता के लिए भेजा था, जिसमें पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया गया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाले पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को फीस सभी पक्ष मिलकर देंगे.
पारिवारिक विवाद और मध्यस्थता के निर्देश
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मध्यस्थता केवल आरके ट्रस्ट तक सीमित है, दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की वसीयत इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि मामले को और उलझाने की जरूरत नहीं है. जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि पारिवारिक विवादों का समाधान परिवार के भीतर ही होना चाहिए और इसे दूसरों के मनोरंजन का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए. अदालत ने परिवार के सभी सदस्यों को मीडिया से बात करने और सोशल मीडिया पर मामले से संबंधित जानकारी पोस्ट करने से बचने की सलाह दी है.
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धोखाधड़ी का आरोप और ट्रस्ट को अमान्य करने की मांग
रानी कपूर द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रिया कपूर ने धोखाधड़ी से आरके फैमिली ट्रस्ट/रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट का गठन किया. रानी कपूर ने ट्रस्ट को शून्य और अमान्य घोषित करने की मांग की है. रानी कपूर ने प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की है, ताकि वे किसी भी प्रकार से आरके फैमिली ट्रस्ट का उपयोग या उसके आधार पर कोई कार्रवाई न कर सकें. इसके साथ ही ट्रस्ट की स्थापना से अब तक के लेखा-जोखा की भी मांग की है.
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