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मनमाने हवाई किराए पर SC सख्त: एयरलाइंस की ‘डायनामिक प्राइजिंग’ पर नकेल कसने की तैयारी

Supreme Court: त्योहारों और छुट्टियों में हवाई टिकटों के बेतहाशा बढ़ते दामों पर लगाम लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है. केंद्र सरकार ने हवाई किराए को नियंत्रित करने वाले ड्राफ्ट नियमों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट की इमारत और यूजीसी का लोगो

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में 4 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

Edited by Shubhra Rai

Supreme Court: केंद्र सरकार ने त्योहार और छुट्टियों के दौरान हवाई जहाज के टिकटों में भारी बढ़ोतरी के मामले में हवाई किराए को रेगुलेट करने के लिए बनाए गए नियमो का ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने नियमों को फाइनल करने के लिए केंद्र सरकार को तीन सप्ताह का समय दे दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच 7 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगी.

क्या है मामला?

पिछली सुनवाई के दौरान को बताया गया था कि हवाई किराए को रेगुलेट करने के नियम तैयार कर लिए गए हैं. इन नियमों को 30 दिनों के भीतर संसद के दोनों सदनों के सामने प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हवाई किराए में होने वाले बेतहाशा उतार चढ़ाव में दखल दिया जाएगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से कहा था कि कुंभ और अन्य त्योहार के दौरान यात्रियों के शोषण को ही देख लीजिए. दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के किराए पर नजर डालिए.

SC दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा

दायर याचिका में प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियों के हवाई किराए और बाकी फीस में अप्रत्याशित उतार चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी नियामक दिशानिदेशों का अनुरोध किया गया है. जस्टिस मेहता ने अदालत में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा था कि हो सकता है कि अहमदाबाद के हवाई किराए में वृद्धि नहीं हुई हो. लेकिन जोधपुर जैसे अन्य जगहों के लिए किराए में भारी बढ़ोतरी हुई है. सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

दायर याचिका में दावा किया गया था कि,

वर्तमान में किसी भी ऑथोरिटी के पास हवाई किराए या अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा करने या उनकी अधिकतम सीमा तय करने की शक्ति नहीं है. इसी का फायदा उठाकर एयरलाइंस गुप्त शुल्कों और कीमतों में मनमाने बदलाव के जरिए उपभोक्ताओं का शोषण कर रही है. याचिका में यह भी कहा गया है कि एयरलाइंस के अनियंत्रित, अपारदर्शी और शोषणकारी व्यवहार जैसे कि मनमाना किराए बढ़ाना, सेवाओं में एकतरफा कटौती, जमीनी स्तर पर शिकायत निवारण की कमी और अनुचित डायनामिक प्राइसिंग एल्गोरिदम-नागरिकों के समानता, आवाजाही की स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने के मौलिक अधिकारों का सीधे तौर पर उल्लंघन करता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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