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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान दिव्यांग हुए अधिकारियों को पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता हैं या नही?

सुप्रीम कोर्ट ने मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान दिव्यांग हुए कैडेट्स/अधिकारियों के मामले में केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या उन्हें पूर्व सैनिक (Ex-serviceman) का दर्जा दिया जा सकता है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान दिव्यांग हुए अधिकारियों से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या दिव्यांग सैनिकों को पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता है क्या? जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार से यह सवाल पूछा है. कोर्ट ने कहा है कि अगर इन्हें पूर्व सैनिकों का दर्जा दिया जाता है तो सरकारी और अर्ध- सरकारी नौकरियों में आरक्षण जैसे लाभ मिल सकेंगे. जो उनके पुनर्वास में अहम साबित. इससे पहले कोर्ट ने पुनर्वास योजनाओं पर विचार करने के लिए छह सप्ताह का समय से दिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अधिकतर कैडेट्स 20 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के होते है और उन्हें रोजगार की जरूरत पड़ती है. अदालत ने कहा कि ऐसे कैडेट्स को भी पूर्व सैनिक या पूर्व सैन्यकर्मी की श्रेणी में शामिल करने पर विचार होना चाहिए. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि ऐसे कैडेट्स को बिना किसी पहचान, दर्जा या पुनर्वास सुविधा के बाहर किया जाना एक गंभीर समस्या है. कोर्ट ने सरकार से दिव्यांग हो चुके कैडेट सहायता राशि देने, ईलाज का खर्च उठाने और स्थिति सुधरने पर सेना में उपयुक्त पद देने पर विचार करने को कहा था. साथ ही कोर्ट ने भविष्य में सभी कैडेट को ग्रुप इंश्योरेंस के दायरे में लाने का भी सुझाव दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने राशि बढ़ाने पर विचार करने का दिया निर्देश

बता दें कि कैडेट्स को फिलहाल 40 हजार रुपए तक का सहानुभूति राशि दिया जाता है, जो कि उनकी चिकित्सा जरूरतों के लिए काफी कम है. कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से सहानुभूति राशि बढ़ाने पर विचार करने को कहा है, ताकि घायल कैडेट्स सही इलाज करा सके. यह मामला 12 अगस्त को तब दर्ज किया गया था, जब एक मीडिया रिपोर्ट में इन कैडेट्स के मुद्दे को उठाया गया था. ये कैडेट कभी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी जैसे देश के शीर्ष सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण का हिस्सा थे. रिपोर्ट के मुताबिक 1985 से लेकर अभी तक 500 सेना अधिकारी कैडेट्स प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग हो चुके है, जिन्हें चिकित्सीय आधार पर बाहर कर दिया गया.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अकेले एनडीए में ही लगभग 20 ऐसे कैडेट्स हैं जिन्हें जुलाई 2025 के बीच पांच साल में ही छुट्टी दे दी गई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक पूर्व सैनिक का दर्जा पाने के हकदार नहीं है, जिससे वे पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के तहत सैन्य सुविधाओं के पात्र हो जाते है, जबकि उनकी विकलांगता, अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त करने से पहले प्रशिक्षण के दौरान हुई थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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