सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना को लेकर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि खड़ी ऑटो पर पेड़ की शाखा गिरना मोटर दुर्घटना नही है. लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके बावजूद पीड़ित को बढ़ा हुआ मुआवजा मिलेगा. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह फैसला दिया है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सड़क किनारे खड़ी ऑटो रिक्शा पर पेड़ की शाखा गिरने से हुई चोट को मोटर वाहन दुर्घटना नही माना जा सकता है. क्योंकि दुर्घटना के कारण और वाहन के बीच प्रत्यक्ष संबंध नही था. कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे के दावे के लिए वाहन की दुर्घटना में प्रत्यक्ष भूमिका होना आवश्यक है.
कानूनी बाधाओं के बावजूद पीड़ित को मिली राहत
कोर्ट ने माना है कि कानून की सीमाओं के कारण मुआवजे की राशि बढ़ाने में कुछ कानूनी बाधाएं थी, लेकिन न्याय सुनिश्चित करने के लिए उसने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट होने के नाते उसका कर्तव्य है कि कानून को केवल तकनीकी रूप से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और संविधान के न्यायपूर्ण सिद्धांतों के अनुरूप लागू किया जाए. इसलिए पीड़ित को उचित राहत दिलाने के लिए अदालत ने अपने विशेष संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया.
बता दें कि 23 जून को 2007 को उमेश कुमार बेंगलुरु में ऑटो-रिक्शा से यात्रा कर रहे थे. भारी बारिश के कारण ऑटो सड़क किनारे एक पुराने पेड़ के नीचे रोका गया. इसी दौरान पेड़ की एक शाखा ऑटो पर गिर गई, जिससे उमेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए. उमेश कुमार ने 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी. हालांकि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2013 में इसे प्राकृतिक आपदा मानते हुए दावा खारिज कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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