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सालबोनी लैंड ग्रैब केस: सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने राज्य सरकार से मांगा ऑडियो-वीडियो ट्रांसक्रिप्ट

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद के PA सुमित रॉय से हुई 11 दिनों की पूछताछ का ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड तलब किया है.रॉय का आरोप है कि जमीन मामले की जगह उनसे पार्टी की फंडिंग पर सवाल पूछे गए.

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Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने जमीन घोटाला मामले में कथित आरोपी और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के पीए सुमित रॉय से हुई पूछताछ की रिकॉर्ड को तलब किया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार को सुमित रॉय से हुई पूछताछ से संबंधित रिपोर्ट को अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान सुमित रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट को बताया कि 11 दिनों तक पूछताछ के बावजूद जांच करने वालो ने उनसे कथित अपराध के बारे में बहुत कम सवाल पूछे गए. याचिकाकर्ता का कहना है कि पूछताछ की पूरी वीडियों रेकॉर्डिंग की गई थी और रॉय से उनके परिवार, राजनीतिक पार्टी, उसमें भर्ती और फंडिंग के बारे में पूछे गए थे.

ऑडियो-वीडियों रिकॉर्ड होंगे उपलब्ध

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर ऑडियो-वीडियों रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे, तो उन्हें शेयर किया जाएगा. सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि क्या आप हमें पूछताछ और जवाब के ट्रांसक्रिप्ट दे सकते हैं? ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड. अगर वे मौजूद हैं, तो आप पता लगा सकते हैं.

एसजी मेहता ने कहा कि अगर वे मौजूद हैं, तो हम निश्चित रूप से उन्हें आपके साथ साझा करेंगे. वही याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हमें स्पष्ट निर्देश मिलें है कि ऐसा कुछ नहीं है. मेरे हस्ताक्षर वाला एक भी दस्तावेज नहीं है.

पिछली सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा था याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करने को तैयार है. वही राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि सुमित रॉय को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है.

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डाली बाधा डाली

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि मुझे उम्मीद है कि आप यह नहीं कह रहे हैं कि पुलिस ही समस्या है. एसजी मेहता ने कहा था कि जब भी हम उन्हें गिरफ्तार करने गए, तो उसमें बाधा डाली गई. खुद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसमें बाधा डाली. इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था.

हालांकि उसी दिन कोर्ट ने सरकारी नौकरी के बदले पैसे वाले दूसरे मामले में सुमित रॉय को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दिया था. कोर्ट ने कहा था कि 10 दिन के अंदर उन्हें जांच एजेंसी के सामने पेश होना होगा. सुमित रॉय को डर था कि अगर वे नौकरी वाले मामले में जांच के लिए पेश होते हैं तो पुलिस उन्हें दूसरे मामले में गिरफ्तार कर सकती है. इसी को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुमित रॉय सलबोनी भूमि कब्जा (लैंड ग्रैब) मामले में आरोपी है.

किसके ऊपर आरोप?

पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज मामले में सुमित रॉय पर आरोप है कि उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबनी इलाके में अवैध रूप से कब्जा कर सरकारी जमीन का इस्तेमाल किया और उसकी बिक्री में शामिल रहे. शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसके बाद उसे बंधक बनाया जा रहा है.

पुलिस के मुताबिक सुमित रॉय की अलग-अलग हिस्सेदारी पर पता नहीं चल पाया है. जिसके बाद एजेंसी ने पश्चिम मेदिनीपुर जिला अदालत का रुख किया, जहां उनके खिलाफ आतंकवादियों के वारंट जारी किए गए.

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-भारत एक्सप्रेस



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