प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेता शाहिद नसीर को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने शाहिद नसीर को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस राजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि अंतरिम जमानत के लिए निचली अदालत के एनआईए कोर्ट में पहले दाखिल करना चाहिए था. कोर्ट ने कहा कि फिलहाल मेरिट के आधार पर विचार नही किया जा सकता है.
कोर्ट ने कही ये बात
कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट में भले ही मामला लंबित क्यों ना हो, लेकिन निचली अदालत मेरिट के आधार पर याचिका पर कानूनन विचार कर सकता है. इस मामले में दाखिल पांचवे चार्जशीट राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के 12 सदस्यों सहित 19 लोगों के खिलाफ दाखिल किया जा चुका है. यह मामला देश में इस्लामिक खिलाफत की स्थापना के लिए युद्ध छेड़ने की साजिश में कथित संलिप्तता से जुड़ा है. एनआईए के मुताबिक देश भर में पीएफआई मामलों में अब तक 105 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया जा चुका है.
NIA ने कई धाराओं में चार्जशीट की दायर
एनआईए ने आईपीसी और यूएपीए अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत पीएफआई सदस्यों के साथ कैडरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की और उनकी पहचान ओएमए सलाम, ईएम अब्दुल रहमान, अनीस अहमद, अफसर पाशा, वीपी नजीरुद्दीन, ई अबूबकर, प्रो. पी कोया, मोहम्मद अली जिन्ना, अब्दुल वाहिद सैत, ए एस इस्माइल, एडवोकेट मोहम्मद यूसुफ, मोहम्मद बशीर, शफीर के पी, जसीर के पी, शाहिद नासिर, वसीम अहमद, मोहम्मद शाकिफ़, मोहम्मद फारूक उर रहमान और यासर अराफात उर्फ यासिर हसन के रूप में हुई है.
पीएफआई के तीन नेताओं को दिया गया था जमानत
इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार पीएफआई के तीन नेताओं को जमानत दे दिया था. पीएफआई दिल्ली के अध्यक्ष परवेज अहमद, पीएफआई दिल्ली के महासचिव मोहम्मद इलियास और अब्दुल मुकीट को जमानत दिया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि अपराध की आय कथित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप अर्जित होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध नहीं बनता है.
-भारत एक्सप्रेस
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