सुप्रीम कोर्ट.
Sheikh Ali Ki Gumti Case: लोधी कालीन स्मारक “शेख अली की गुमटी” के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डिफेंस कॉलोनी एसोसिएशन को 40 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर भुगतान करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि “शेख अली की गुमटी” परिसर के अंदर स्थित पार्क का इस्तेमाल बास्केटबॉल या बैडमिंटन के लिए नही किया जा सकता है. जस्टिस सुधांशू धुलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है. कोर्ट 28 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
कोर्ट ने अपने आदेश में पार्कों के सौंदर्यीकरण और रखरखाव के लिए बागवानी विभाग सहित अन्य विभागों को समन्वय करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि स्मारक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की वाणिज्यिक गतिविधियों जैसे कि दुकान या स्टॉल नही लगाई जाएगी.
‘शेख अली की गुमटी’ को घोषित किया संरक्षित स्मारक
इससे पहले कोर्ट ने “शेख अली की गुमटी” को कानून के तहत संरक्षित स्मारक घोषित करने के लिए एक नई अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया था. यह पुरातात्विक महत्व का 500 साल पुराना मकबरा है. इस पर डिफेंस कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन, दिल्ली ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था. साथ ही यहां दिल्ली नगर निगम एक अनधिकृत कार्यालय और पार्किंग संचालित करता था.
दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 2019 में याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. एएमएएसआर अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारकों को कानूनी संरक्षण प्रयासों और उनके आसपास की गतिविधियों पर प्रतिबंधों का लाभ मिलता है. बता दें कि यह याचिका डिफेंस कॉलोनी के निवासी राजीव सूरी ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने शेख अली की गुमटी को प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित स्मारक घोषित करने की मांग की थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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