लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को केंद्र सरकार से बड़ी राहत मिली है. सोनम वांगचुक पर लगाए गए एनएसए को केंद्र सरकार ने वापस ले लिया है. यह आदेश तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिया जाएगा. गृह मंत्रालय के अनुसार सोनम वांगचुक ने एनएसए एक्ट के तहत अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है. वह सितंबर 2025 से जोधपुर जेल में बंद थे और अब लगभग 170 दिन बाद उनकी रिहाई संभव हो सकेगी.
वांगचुक को रिहा करना मुमकिन
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में रखें जाने पर सवाल उठाते हुए कहा था, कि सरकार उनके बयानों को बहुत ज्यादा पढ़ रही है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि हेल्थ ग्राउंड पर सोनम वांगचुक को रिहा करना मुमकिन नहीं है.
24 बार हुई हेल्थ की जांच
एसजी मेहता ने कहा था कि सोनम वांगचुक की समय-समय पर अबतक कुल 24 बार हेल्थ की जांच की गई है. वह फिट और तंदरुस्त है. उन्हें पाचन संबंधी कुछ दिक्कत थी, जिसका ईलाज चल रहा है. चिंता की कोई बात नहीं है. हम इस आधार पर रिहा करने की इजाजत नहीं दे सकते. हेल्थ के आधार पर उन्हें रिहा करना संभव नहीं है.
वहीं, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन ने दलील दी थी कि वांगचुक ने अपने भाषण में नेपाल जैसी हिंसक आंदोलन की संभावना का जिक्र किया था और कहा था कि युवा शांतिपूर्ण तरीकों की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं. इसपर अदालत ने कहा था कि वांगचुक ने हिंसा की वकालत नहीं की, बल्कि उसकी आशंका पर चिंता जताई थी.
कोर्ट चिंतित
कोर्ट ने कहा था कि वह चिंतित है. हमें पूरा वाक्य पढ़ना होगा. कुछ लोग गांधीवादी शांतिपूर्ण रास्ता छोड़ रहे हैं, यह चिंता की बात है. फोकस अहिंसा से दूर जाने पर है, जो चिंताजनक बताया गया है. इसपर एएसजी नटराजन ने कहा था कि वांगचुक ने हाइब्रिड अभिव्यक्तियों का इस्तेमाल किया.
बता दें कि एनएसए सरकार को यह अधिकार देता है कि अगर किसी व्यक्ति से देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा माना जाए तो उसे बिना मुकदमे के हिरासत में रखा जा सकता है. इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद किया जा सकता है.
वांगचुक कब बुए गिरफ्तार
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लेह में भड़की हिंसा के बाद वांगचुक को 26 सितंबर को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था. इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे. जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता वांगचुक को राजस्थान के जोधपुर जेल में रखा गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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