Kalanidhi Maran News: सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइसजेट के प्रमोटर विवाद मामले में कलानिधि मारन और केएएल की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है. कलानिधि मारन की केएएल ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें स्पाइसजेट से 1323 करोड़ रुपये का हर्जाना पाने के उनके दावे को खारिज कर दिया गया था. जिसपर जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस.
चंदूरकर को पीठ के हाई कोर्ट के फैसले के दखल देने से इनकार कर दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने केएएल एयरवेज और कलानिधि मारन की 1323 करोड़ रुपये से ज्यादा के.मुआवजे वाली अपील को खारिज कर दिया था. यह अपील स्पाइसजेट के खिलाफ दायर की गई थी.
₹1323 करोड़ हर्जाना पाने की कोशिश नाकाम
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अपील दायर करने में 55 दिन की और उसे फिर से दायर करने में 226 दिन की देरी हुई थी. कोर्ट ने इस देरी को माफ करने से इनकार करते हुए कहा था कि यह एक जानबूझकर लिया गया जोखिम था और उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कोर्ट और स्पाइसजेट से जानकारी छिपाई थी.
स्पाइसजेट की तरफ से बयान जारी कर कहा गया कि यह क्लेम पहले भी आर्बिटल ट्रिब्यूनल और दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से खारिज किया जा चुका था. यह पूरा मामला जनवरी 2015 से शुरू हुआ. उस समय स्पाइसजेट के पिछले मालिक अजय सिंह ने फाइनेंस से जुड़ी फाइनेंशियल दिक्कतों के कारण बंद पड़ी एयरलाइन को मारन से खरीदा था.
बता दें कि ट्रिब्यूनल ने स्पाइसजेट से 1323 करोड़ रुपए के हर्जाने की मारन की अपील को खारिज कर दिया था. फरवरी 2015 में सन नेटवर्क के मारन और उनकी निवेश कंपनी केएएल एयरवेज ने.स्पाइसजेट में अपने 58.46 फीसदी शेयर सिंह को महज दो रुपए में ट्रांसफर कर दिया था. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नकदी संकट के कारण एयर लाइन ठप पड़ गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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