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1995 का एक्साइज घूसकांड: अधिकारियों को HC से मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची UP सरकार, अपील स्वीकार

भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी केंद्रीय एक्साइज विभाग के अधिकारियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत के खिलाफ यूपी सरकार की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. यह रिश्वत मामला 1995 का है.

Supreme Court

भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी केंद्रीय एक्साइज विभाग के अधिकारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत के खिलाफ दायर उत्तर प्रदेश सरकार की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. जस्टिस पंकज मित्तल की अध्यक्षता वाली पीठ राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौखिक और दस्तावेजों का सही मूल्यांकन किए बिना ही आरोपी को राहत दे दी है.

सबूतों के अभाव और साजिश के आरोप पर दलीलें

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि आरोपी अधिकारी रिश्वत मांगने और पैसे लेने की पूरी साजिश का हिस्सा थे. वहीं आरोपी की ओर से पेश वकील राजीव कुमार बंसल ने कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और उन्हें सिर्फ शक के आधार पर फंसाया गया है. यह मामला साल 1995 का है, जब केंद्रीय एक्साइज विभाग के अधिकारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा था. आरोप था कि अधिकारियों ने बाराबंकी की एक कंपनी से जुड़े कुछ दस्तावेज जब्त किए और उन्हें वापस करने के बदले 80 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की. जिसकी शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

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ट्रायल कोर्ट से सजा और HC से बरी

जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से रिश्वत के तौर पर दी गई राशि को सीबीआई ने बरामद कर लिया. इसके बाद सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण कानून और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया. ट्रायल कोर्ट ने साल 2014 में आर. के श्रीवास्तव, ए. के गाबा, दुष्यंत कुमार और आलोक गुप्ता को दोषी ठहराया था. जिसके खिलाफ दोषियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अपील दायर की. जिस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को साल 2019 में सबूत के अभाव में बरी कर दिया. जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. जिस पर कोर्ट सुनवाई कर रहा है.



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