पश्चिम बंगाल 2021 में विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी समर्थक एक परिवार पर हमला करने के आरोपियों को मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने जमानत को रद्द करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं लोकतंत्र की जड़ों पर गंभीर हमले हैं. कोर्ट ने कहा कि आरोपी प्रतिवादियों को जमानत पर रहने की अनुमति दी जाती है, तो निष्पक्ष सुनवाई होने की संभावना नहीं हैं.
आरोपियों को दी गई जमानत को किया रद्द
ऐसे में अपराध की प्रकृति और गंभीरता जो लोकतंत्र की जड़ों पर हमले से कम नहीं है, और आरोपियों द्वारा निष्पक्ष मुकदमे को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने की संभावना है, इसलिए आरोपियों को दी गई जमानत को रद्द किया जाता है. शिकायतकर्ता के घर पर हमला चुनाव परिणामों के दिन बदला लेने के उद्देश्य से किया गया था.
कोर्ट ने जमानत रद्द करने का बताया दो कारण
कोर्ट ने शेख जमीर हुसैन, शेख नुराई, शेख अशरफ, शेख करिबूल और जयंता डोन की जमानत को रद्द किया है. कोर्ट ने जमानत रद्द करने का दो कारण बताया है. पहला कारण है अपराध की गंभीरता, क्योंकि यह अपराध लोकतंत्र पर हमला है और दूसरा कारण है, आरोपी निष्पक्ष सुनवाई को प्रभावित कर सकते हैं.
बीरभूमि जिले के गुमसीमा गांव की हैं घटना
दरअसल यह घटना बीरभूमि जिले के गुमसीमा गांव की हैं. शिकायतकर्ता के मुताबिक इस गांव में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं. हमलावर इस बात को लेकर नाराज थे कि यह हिंदू परिवार बीजेपी समर्थक हैं परिवार के मुखिया ने चुनाव प्रचार में बीजेपी का सक्रिय प्रचार भी किया था. उन्होंने उसे परिणाम भोगने की धमकी दी थी. 2 मई 2021 यानी चुनाव परिणाम वाले दिन इन लोगों ने उनकी दुकान और मकान पर हमला कर दिया. यह लोग तभी वापस गए जब निर्वस्त्र कर दी गई महिला ने खुद आग लगाने की धमकी दी.
-भारत एक्सप्रेस
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