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अरावली की नई परिभाषा तय करेगा सुप्रीम कोर्ट, अवैध माइनिंग रोकने के लिए विशेष कमेटी गठित

Aravalli Illegal Mining Case: अरावली को अवैध माइनिंग से बचाने और इसकी नई परिभाषा तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी बनाई है। यह कमेटी 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद 7 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।

Supreme Court order
Edited by Shubhra Rai

Aravalli Illegal Mining Case: अरावली की नई परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि समिति का प्रमुख कार्य पूर्व समिति की रिपोर्ट में अपनाए गए 100 मीटर ऊंचाई और 500 मीटर गैप मानदंडों की वैज्ञानिक और पारिस्थितिक वैधता का परीक्षण करना होगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी की अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के डायरेक्टर जनरल करेंगे.

7 सितंबर को अगली सुनवाई

समिति में कंचन देवी के अलावे, डॉक्टर सुभाष आशुतोष ( भारतीय वन सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक), डॉक्टर राजेन्द्र कुमार शर्मा (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक), बृज मोहन सिंह राठौर (पर्यावरण मंत्रालय में पूर्व संयुक्त सचिव) और प्रोफेसर अशोक के भटनागर (दिल्ली विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख) शामिल है. समिति को 31 अगस्त तक रिपोर्ट देना है. उसके बाद कोर्ट 7 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा.

निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन

वही समिति में शामिल सदस्यों को लेकर कुछ पर्यावरणविद और दो याचिककर्ताओ ने सवाल उठाए है. उन्होंने कहा कि एक ब्यूरोक्रेट्स की अगुवाई वाली समिति जो सरकार को रिपोर्ट करती है, कैसे निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन कर पायेगी. समिति को इस बात की जांच करनी है कि क्या राजस्थान की 12081 पहाड़ियों में से केवल 1048 ही निर्धारित 100 मीटर की ऊंचाई की सीमा को पूरा करती हैं, और क्या इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में पहाड़ी संरचनाएं पर्यावरणीय संरक्षण से वंचित रह जाती है.

अरावली की नई परिभाषा दायरे से बाहर

कमेटी को उन क्षेत्रों की विस्तृत पहचान करने का भी निर्देश दिया गया है, जो अरावली की नई परिभाषा के कारण संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकते हैं. इस दौरान समिति को संबंधित क्षेत्रों की जैव विविधता, परिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखना होगा ताकि किसी संवेदनशील इलाके को अनजाने में संरक्षण से वंचित ने किया जाए.

एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन

यह मुद्दा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात मे अरावली पहाड़ियों और अरावली पर्वतमालाओं की अलग-अलग परिभाषाओं के कारण पैदा हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप नियामक कमियां और अवैध माइनिंग के मामले सामने आए. इन विसंगतियों को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था.

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-भारत एक्सप्रेस 



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