मुंबई के प्रतिष्ठित गेटवे ऑफ इंडिया के पास बन रहे विवादास्पद पैसेंजर जेट्टी और टर्मिनल प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मुंबई हाई कोर्ट जाने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हाई कोर्ट से मानसून के समाप्त होने से पहले तक जल्द फैसला लेने को कहा है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश संजय हेगड़े ने कहा, यह आमची मुंबई और थमची मुंबई के बीच का मामला है. जिसपर सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आमची मुंबई कोलाबा में नही रहती, यह मलाड, थाने आदि में रहती है. कोर्ट ने कहा हर कोई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चाहता है, लेकिन मेरे घर के पीछे नहीं.
शहर में कुछ अच्छा हो रहा है. तटीय सड़कों का फायदा देखिए. पहले बॉम्बे हाईकोर्ट जाने वाले व्यक्ति को 3 घंटे लगते थे अब 40 मिनट लगते है.यह याचिका कफ परेड रिजिडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्षा लौरा डीसूजा ने दाखिल की थी. बॉम्बे हाईकोर्ट के 7 और 8 मई के आदेशों को चुनौती दी थी.
गेटवे ऑफ इंडिया के पास 500 मीटर दूरी पर प्रस्तावित टर्मिनल
याचिका में इस प्रोजेक्ट से संबंधित निर्माण, विध्वंस या किसी भी प्रकार के परिवर्तनात्मक कार्यों पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है. याचिकाकर्ता ने कहा था कि हाईकोर्ट ने इस प्रोजेक्ट से होने वाले व्यापक जनहित और अपूरणीय नुकसान की अनदेखी की है.
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगायाथा कि प्रोजेक्ट की शुरुआत बिना किसी सार्वजनिक सूचना, परामर्श या स्थानीय निवासियों से विचार विमर्श के की गई. गेटवे ऑफ इंडिया नौका यातायात का केंद्र है. नाव से लोग एलिफेंटा गुफाओं और मांडवा गांव तक जाते हैं. प्रस्तावित जेट्टी और टर्मिनल का निर्माण गेटवे ऑफ इंडिया से लगभग 500 मीटर की दूरी पर रेडियो क्लब के पास होना है. स्थानीय लोग.इसे पर्यावरण के लिए और आसपास के क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक स्थलों के लिए खतरा बता रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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