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डिजिटल अरेस्ट’ पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन: 54,000 करोड़ की ठगी देख हैरान हुए सीजेआई; बैंकों को दी सख्त नसीहत

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर केंद्र और बैंकों को फटकार लगाई है. सीजेआई ने 54,000 करोड़ की लूट पर चिंता जताते हुए पूरे देश में नई SOP लागू करने का निर्देश दिया है.

Digital Arrest Cyber Fraud
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामले में लिए गए स्वतः संज्ञान और दायर याचिकाओं पर जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने अगले सप्ताह सुनवाई का भरोसा दिया है.

चली गई पूरी जिंदगी की कमाई

अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में प्रगति रिपोर्ट तैयार है. लिहाजा जल्द सुनवाई कर ली जाए. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से आरबीआई द्वारा लाए गए एसओपी को पूरे देश मे लागू करने का निर्देश दिया था. सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि इसके शिकार वरिष्ठ नागरिक है, जो रिटायर्ड दंपत्ति था, जिसकी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी चली गई.

कोर्ट ने कहा था कि अब तक 54000 करोड़ से अधिक की राशि साइबर ठगी के जरिए निकाली जा चुकी है, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि आरबीआई द्वारा तैयार किए गए एसओपी को पूरे देश में लागू किया जाए, ताकि डिजिटल फ्रॉड पर काबू पाया जा सके.

बैंक धोखेबाजों को देते है ऋण: CJI

सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ये बैंक बोझ बनते जा रहे हैं. बैंकों को यह समझना चाहिए कि वे धन के संरक्षक है और उन्हें इस पर जरूरत से ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. इन भरोसे को नहीं तोड़ना चाहिए. समस्या यह है कि ये बैंक इन धोखेबाजों को ऋण देते है और फिर एनसीएलएटी आदि कार्रवाई करते है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को 2 जनवरी 2026 से लागू एसओपी को लागू करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अंतर एजेंसी समन्वय और धोखाधड़ी पीड़ितों का पता लगाने के लिए इसे पूरे देश में लागू किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने अंबाला में बुजुर्ग महिला से फर्जी आदेश दिखाकर ठगी की बात सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान लिया था.

कैसे हुआ ठग?

दरअसल, सितंबर में हरियाणा रोडवेज विभाग की रिटायर्ड ऑडिटर शशिबाला सचदेवा और उनके पति से फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने करोड़ों रुपये की ठगी कर ली थी.

इतना ही नहीं पीड़ित महिला और उनके पति को 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया था. उस दौरान मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने तक कि धमकी दी गई. जिसकी शिकायत पीड़िता ने पुलिस से की थी.

उन्होंने पुलिस को बताया था कि 3 सितंबर को उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक महिला ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी से बताते हुए संपर्क किया. साथ ही ये भी कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आ रहा है, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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