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CBSE Three-Language Policy: छठी से 9वीं तक के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, जर्मन-फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाएं रखने की छूट जारी

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति में कक्षा 6 के छात्रों को भी कक्षा 7 से 9 तक दी जा रही राहत देने का निर्देश दिया है. कोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्था 2027-28 शैक्षणिक सत्र से लागू होगी.

CBSE Three-Language Policy: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नई तीन भाषा नीति के तहत छठी कक्षा के छात्रों को भी वही राहत देने का निर्देश दिया है, जो फिलहाल 7वीं, 8वीं, 9वीं की तर्ज़ पर मिल रही है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह निर्देश दिया है.

एक भारतीय भाषा पहले से कोर्स में शामिल है और छूट के बाद तीन भाषा नीति में अब 7 से 9 तक के लिए सिर्फ एक देशी भाषा अनिवार्य है. ऐसे में उदाहरण के तौर पर जैसे यूपी और उत्तर भारत में कोर्स में पहले से हिन्दी भाषा शामिल है यानी वो भारतीय भाषा के तौर पर है. ऐसे में संस्कृत या अन्य देशी भाषा नही लेनी पड़ेगी. कोर्ट के इस आदेश के बाद जिन बच्चों ने पहले से कोई वैकल्पिक विदेशी भाषा जैसा जर्मन या फ्रेंच ले रखी थी. अब वो जारी रख सकेंगे, क्योंकि छूट के तहत बाकी दो विदेशी ले सकते है.

अंग्रेजी कोर्स में पहले से अनिवार्य है. ऐसे में तीसरी भाषा वैकल्पिक होगी. छठवीं से 9 वीं तक वैकल्पिक भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल करेगा और कक्षा 10 वी में इसकी बोर्ड परीक्षा नहीं होगी. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया था कि तीन भाषा नीति की व्यवस्था 2027-28 के सत्र से लागू होगा.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कहा गया था कि नई नीति के कारण लाखों छात्रों के सामने अचानक तीसरी भाषा पढ़ने की जरूरत पैदा हो गई है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि कई जगहों पर नई भाषाओं की किताबें तक उपलब्ध नहीं है और पर्याप्त शिक्षक भी नहीं है.

तीन भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से मांगी व्यावहारिक रिपोर्ट

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई द्वारा कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए तीन भाषा नीति को अचानक लागू करने पर सवाल उठाया था. कोर्ट ने कहा छठवीं क्लास के बच्चों के लिए तीसरी भाषा अगले साल से लागू किया जाना चाहिए. पिछली सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया था कि वे इस सुझाव पर विचार करेंगे. उन्होंने कहा था कि इस पूरे मामले और तीन भाषा नीति से जुड़ी व्यवहारिक समस्याओं पर विचार करने के लिए समिति का गठन किया गया है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा था कि क्या स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या है? कोर्ट ने व्यवस्था संबंधित मुद्दे पर रिपोर्ट देने को कहा था.

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि अचानक इन भाषाओं को सीखकर 10वीं की परीक्षा कैसे दे सकते हैं? इससे अव्यवस्था फैल जाएगी. यह याचिका छात्रों, पैरेंट्स और टीचर्स की ओर से दायर की गई है. सीबीएससी ने कक्षा 9 और 10 के छात्रो के लिए सीबीआई ने यह बड़ा बदलाव करते हुए सर्कुलर जारी किया है. जारी अधिसूचना के मुताबिक अब छात्रों को तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होगी. सीबीएसई की ओर से जारी यह अधिसूचना 1 जुलाई से लागू होगा. सीबीएसई की नई सर्कुलर ने छात्रों, अभिभावकों और कई स्कूलों के बीच हलचल पैदा कर दिया है.

CBSE की नई भाषा व्यवस्था 2026–27 से लागू होगी

स्कूल असमंजस में है कि इसे कैसे लागू किया जाए. सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विद्यार्थी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुना जा सकता है, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों. अन्यथा विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ना होगा. यह व्यवस्था 2026-2027 से लागू होगी. हिंदी, तमिल, मराठी,बंगाली, गुजराती, कन्नड़, पंजाबी, संस्कृत सहित कई भाषाओं को शामिल किया गया है.

सीबीएसई के अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों में मातृभाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति गतिविधि मजबूत करना है. सीबीएसई ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए तीन भाषाओं का पढ़ना अनिवार्य कर दिया है. लेकिन तीसरी भाषा (आर 3) के पेपर को बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं किया गया है. तीसरी भाषा का असेसमेंट सिर्फ स्कूल लेवल तक सीमित रहेगा.

हालांकि तीसरी भाषा के इंटरनल मार्क्स या ग्रेड सीबीएसई 10वीं की फाइनल मार्कसीट में शामिल किए जाएंगे. सीबीएसई ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 31 मई 2026 तक सभी अपनी तीसरी भाषा तय कर लें. कई स्कूलों ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन कुछ संस्थानों को भाषा चयन और शिक्षक व्यवस्था जैसी संस्थानों को भाषा चयन और शिक्षक व्यवस्था जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बोर्ड लगातार स्कूलों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर मदद भी उपलब्ध करा रहा है. ताकि नई व्यवस्था समय पर लागू हो सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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