बिहार एसआईआर को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 16 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि वे आज ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभी सचिवों को पैरालीगल स्वयंसेवकों और मुफ्त कानूनी सहायता परामर्शदाताओं की सेवाएं प्रदान करने के लिए पत्र भेजें ताकि बाहर रखे गए व्यक्तियों को वैधानिक अपील दायर करने में सहायता मिल सके.
कोर्ट ने कहा सचिव तुरंत प्रत्येक गांव में पैरालीगल स्वयंसेवकों के मोबाइल नंबर और पूर्ण विवरण पुनः अधिसूचित करें, जो बीएलओ से संपर्क करेंगे. वे अपील का मसौदा तैयार करने और मुफ़्त कानूनी सहायता परामर्श सेवाएँ प्रदान करेंगे. उसके बाद एसएलएसए जानकारी एकत्र करेगा और एक हफ़्ते में अदालत को स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा. चुनाव आयोग के वकील ने एडीआर समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से हलफनामे में किए गए वोट काटे जाने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं. गलत कहानी गढ़ी जा रही है.
उन्होंने कहा कि वे कह रहे हैं कि बहुत सारे मुस्लिमों के नाम हटाए गए हैं, लेकिन जब आपके पास डेटा ही नहीं है, तो आपको कैसे पता? राकेश द्विवेदी ने कहा कि मैं इस अदालत से आदेश चाहता हूं कि जिन लोगों को अपना नाम जोड़वाना है, वे अगले 5 दिनों में आवेदन करें, क्योंकि उसके बाद दरवाजे बंद हो जाएंगे. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम लीगल सर्विस अथॉरिटी के सचिव को इस पर गौर करने का निर्देश दे सकते हैं. आपकी ओर से हलफनामा देने में कुछ भी गलत नहीं लगता. अन्य लोग भी ऐसा कर सकते हैं, लेकिन हमें चुनाव आयोग को इसकी पुष्टि के लिए समय देना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने जताई जांच की संभावना
भूषण ने कहा कि हम 2003 में अपनाई गई एसआईआर प्रक्रिया से भारी खामियां दिखाना चाहते हैं. किसी को भी गणना फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं थी. पहले की सूची को आधार सूची माना जाता था. बूथ स्तर के अधिकारियों को घर-घर जाकर परिवार के मुखिया से मिलना होता था. पता लगाना होता था कि कौन रहता है और उसे शामिल करना होता था. जस्टिस कांत ने कहा कि लेकिन तकनीकी प्रगति के साथ, हमें 2025 में 2003 की प्रक्रिया का पालन नहीं करना चाहिए.
सुनवाई के दौरान राकेश द्विवेदी ने कहा कि जिस महिला का नाम काटने का दावा किया जा रहा है. उसका मसौदा सूची और अंतिम सूची में भी नाम है. द्विवेदी ने कहा कि एक तर्क यह था कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों के नाम थे, लेकिन अचानक उनके नाम सूची से गायब हो गए. मुझे अब तक तीन हलफनामे मिले हैं. हमने इसकी जाँच की है. यह हलफनामा पूरी तरह से झूठा है. आरोपों का विरोध करते हुए एडीआर की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इसकी जांच करा ली जाए.
शिकायत होने पर लोग 5 दिनों के भीतर करें अपील- कोर्ट
द्विवेदी ने कहा कि आयोग ने निर्देश दिया गया था कि जिन नामों को सूची से बाहर रखा गया है, उन्हें 8 अक्टूबर तक प्रकाशित करें. हमने इसे हर जगह लगा दिया है. उन्हें तब पूरी जानकारी थी. बीएलओ, बीएलए, राजनीतिक दल वगैरह, सब वहाँ मौजूद हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अब इसमें संदेह है कि ऐसा कोई व्यक्ति है भी या नहीं. द्विवेदी ने कहा कि भूषण के हलफनामे में बड़ी संख्या में लोगों के सूची से बाहर होने की बात हटा दी है. अब वे कहते हैं कि 130 लोगों को सूची से बाहर किया गया है और वे कहते हैं कि कुछ लोग पहली बार नामांकन कराना चाहते थे. अगर उन्हें कोई शिकायत है तो वे 5 दिनों के भीतर अपील दायर कर सकते हैं.
द्विवेदी ने कहा कि ये राजनीतिक दल सिर्फ़ नैरेटिव सेट करना चाहते हैं और कोई मदद नहीं. अब उन्होंने कई मुसलमानों को बाहर रखा है, आदि का विश्लेषण किया है. हम एक ऐसे आदेश की प्रार्थना कर रहे हैं जिसके तहत लोग 5 दिनों में अपील दायर कर सकें क्योंकि उसके बाद विंडो बंद हो जाएगा. जस्टिस कांत ने कहा कि हम सिर्फ़ उन लोगों की मदद करना चाहते हैं जिन्हें शामिल नहीं किया गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता हंसारिया और द्विवेदी ने कहा कि अगर कोई संगठन ऐसी बातें अदालत में रख रहा है जहाँ उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है, तो उसके खिलाफ अदालत को गुमराह करने (perjury) की सुनवाई नहीं होनी चाहिए.
जस्टिस बागची ने कहा कि यह दस्तावेज़ कल सौंपा गया था. जब आप दस्तावेज़ पीठ को सौंपते हैं तो यह एक ज़िम्मेदारी होती है. इसपर प्रशांत भूषण ने कहा कि मुझे यह दस्तावेज़ एक ज़िम्मेदार व्यक्ति ने दिया था. अगर चुनाव आयोग कहता है कि कोई समस्या है, तो विधिक सेवा प्राधिकरण पूछताछ कर सकता है, क्योंकि नाम और पता दिया गया है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि हमारी बात नहीं सुनी जाएगी. भूषण ने कहा कि डुप्लीकेट मतदाता है. इसपर चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि इनके हलफनामे में एक नाम नहीं दिया गया है. यह पहले हलफनामा दाखिल करें कि जो कहा वो सही है.
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