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कफ सिरप पीने से बच्चों की हुई मौत मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 10 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

कफ सिरप पीने से बच्चों की हुई मौत की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 10 अक्टूबर को सुनवाई कर सकता है. याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की.

Edited by Vaibhav Gupta

कफ सिरप पीने से बच्चों की हुई मौत की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 10 अक्टूबर को सुनवाई कर सकता है. याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की, जिसपर कोर्ट ने डिफेक्ट को दूर करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने संकेत किया कि डिफेक्ट दूर होने के बाद 10 अक्टूबर को वह सुनवाई कर सकता है.

दवा नियामक संस्थाओं को निर्देश की मांग

यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने दायर की हैं. दायर याचिका में केंद्र सरकार, दवा नियामक संस्थाओं और राज्यों को निर्देश करने की मांग की गई है. दायर जनहित याचिका में देशभर में जहरीली खांसी की दवाओं को तुरंत रिकॉल और बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई है. साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. दायर याचिका में सिरप पीने से बच्चों की हुई मौत की सीबीआई जांच की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया है कि सभी सिरप आधारित दवाओं का डीईजी/ईजी टेस्ट अनिवार्य करने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति गठित हो जो दवा सुरक्षा तंत्र में सुधार की सिफारिश करें, पीड़ितों को मुआवजा देने और एक राष्ट्रीय डिजिटल ड्रग्स रिकॉल पोर्टल बनाया जाए ताकि नकली/जहरीली दवाओं की जानकारी तुरंत साझा की जा सके. जनहित याचिका में कहा गया है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी है.

संयोग नहीं, संस्थागत विफलता

जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि यह घटना कोई संयोग नहीं बल्कि भारत के दवा नियंत्रण तंत्र की संस्थागत विफलता है. दवा निर्माण में निगरानी, परीक्षण और पारदर्शिता की कमी बार-बार बच्चों की जान ले रही है. याचिका में यह भी कहा गया है कि तमिलनाडु की कंपनी Sresan Pharma Pvt.Ltd द्वारा बनाए गए इस सिरप की देशभर में बिक्री हो रही थी, लेकिन केंद्र सरकार या CDSCO ने तुरंत राष्ट्रीय स्तर पर कोई रिकॉल या बैन जारी नहीं किया.

इस बीच तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र सरकार ने राज्य स्तर पर उत्पाद को निलंबित किया, लेकिन तब तक कई बच्चों की जान जा चुकी थी. बता दें कि पिछले एक महीने में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 11 बच्चों और राजस्थान में 3 बच्चों की मौत हो गई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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