सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व सैन्य अधिकारी के खिलाफ कथित बलात्कार मामले में दाखिल चार्जशीट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. जस्टिस सुधांशु धुलिया और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कैप्टन (सेवानिवृत्त) राकेश वालिया को राहत देते हुए कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने चार्जशीट को खारिज न करने के फैसले लेकर गलती की है. वालिया ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अश्विनी कुमार दुबे ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से दी गई गवाही से साफ है कि कोई अपराध नही हुआ था, इसलिए वालिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि महिला एक सेक्सटॉर्शन गिरोह चलाती है, और अपने जाल में फंसा कर लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराती है. उसके बाद सुलह के लिए पैसे की डिमांड करती है.
याचिका में कहा गया था कि गलत और दुर्भावनापूर्ण अभियोजन शुरू किया गया है, क्योंकि पिछले आठ सालों में महिला के कहने पर सात अलग-अलग थानों में याचिकर्ता सहित नौ लोगों के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज कराई गई थी. याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता भारतीय सेना का सम्मनित अधिकारी रहा है, जिसकी उम्र 63 साल है और वह गंभीर बीमारियों से ग्रसित है. उसे दिल का दौरा भी पड़ चुका है. उसे कैंसर होने का भी पता चला है.
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता के मुताबिक वर्ष 2019 और 2020 के बीच शिकायतकर्ता ने याचिकाकर्ता से संपर्क किया था और दावा किया था कि वह सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उनकी पुस्तक “ब्रोकन क्रेयॉन्स कैंन स्टिल कलर” के प्रचार के संबंध में थी. याचिका में याचिकाकर्ता शिकायतकर्ता के प्रस्ताव में रुचि रखता था और उसने लॉकडाउन खत्म होने के बाद जून 2021 में उसकी सेवा लेने का फैसला किया.
उसके बाद याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता के बीच छतरपुर मेट्रो स्टेशन पर मुलाकात हुई. मुलाकात करने के बाद शिकायतकर्ता नोएडा चला गया. सेक्सटॉर्शन में किसी व्यक्ति की निर्वस्त्र तस्वीर या किसी यौनिक गतिविधि को सार्वजनिक करने की धमकी देकर लोगों को फंसा कर उनसे पैसा ऐंठा जाता है.
-भारत एक्सप्रेस
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