छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में आरोपी, पूर्व आबकारी मंत्री व कोंटा विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ लखमा को अंतरिम जमानत दे दिया है. कोर्ट ने कहा अंतरिम जमानत के दौरान इस मामले से संबंधित कोई भी भाषण नही देगा.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि शर्तो के उल्लंघन करने पर जमानत को रद्द कर दिया जाएगा. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि उन्हें 16 जनवरी 2025 को ईडी ने गिरफ्तार किया था और 2 अप्रैल 2025 को आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था. दोनों मामलों में दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. इस मामले में गिरफ्तार कुछ आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी है.
कांग्रेस सरकार के समय हुआ कथित शराब घोटाला
इस मामले में कोई बरामदगी नही हुई है और ना ही कोई मनी ट्रेल का पता चला है. उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला धारा 161 और धारा 164 पर आधारित है. वर्ष 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले का खुलासा हुआ था. आरोप है कि आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सिंडिकेट के साथ मिलीभगत कर अवैध शराब बिक्री से भारी कमीशन वसूला. ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार घोटाले की कुल राशि लगभग 3200 करोड़ रुपये बताई गई है. बात दे कि छत्तीसगढ़ में करीब 2200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा का नाम शामिल है.
ईडी ने इस घोटाले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और अरुणपति त्रिपाठी को मास्टरमाइंड बताया है. आरोप है कि जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी, तब यह घोटाला हुआ है. साल 2019 में कथित शराब घोटाला मामले में ईडी ने कई अधिकारियों और कारोबारियों के ठिकानों पर छापा मारा था.
इस मामले में ईडी ने छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के अधिकारी, कांग्रेस नेता सहित अन्य से पूछताछ कर चुकी है. ईडी के मुताबिक यह 2000 करोड़ रुपए का यह कथित घोटाला है. मामले में कांग्रेस नेता के भाई अनवर ढेबर को घोटाले का किंगपिन बताया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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