सुप्रीम कोर्ट ने तमिल अभिनेता से नेता बने एस वी शेखर को एक महिला पत्रकार के खिलाफ टिप्पणी करने के मामले में मिली राहत को बरकरार रखने का आदेश दिया है.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. एसवी शेखर ने दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है.
मामले की सुनवाई के दौरान शेखर की ओर से पेश वकील ने कहा कि मैं उनसे संपर्क नहीं कर पा रहा हूं. इसलिए मैंने अपने दोस्तों के जरिए संपर्क किया. मैंने बिना शर्त माफी मांगते हुए एक विस्तृत पत्र भेजा है. मैं आपके हाथों में हूं. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने शेखर के आचरण पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि एक महिला के खिलाफ एक घिनौना अभियान चलाया, जो उसकी गरिमा पर सीधा हमला था.
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए यह भी कहा था कि हमें यह देखकर आश्चर्य होता है कि आप इस मामले को अब भी आगे बढ़ा रहे हैं. यह एक घटिया और बेशर्म हरकत थी. उन्होंने एक महिला की गरिमा पर सीधा हमला किया. यह कोई पहला मामला नही लगता है. संभव है कि वह अन्य महिलाओं को भी परेशान कर रहे हों, बस इस बार पत्रकार संस्था ने उन्हें तो दिया.
महिला पत्रकारों पर आपत्तिजनक पोस्ट
बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट ने शेखर को राहत देने से इनकार करते हुएनिचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा था. जिसके खिलाफ शेखर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
यह मामला सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें एस. वे.शेखर ने फेसबुक पर महिला पत्रकारों के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की थी.
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह पोस्ट न केवल महिलाओं के मान-सम्मान को ठेस पहुचाने वाली थी, बल्कि इससे समाज में अशांति और महिलाओं के प्रति घृणा का माहौल भी पैदा हुआ.
शेखर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना), अनुच्छेद 509 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुचाना) और तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम 2002 की धारा 4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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