सीजेआई बीआर गवई. (फाइल फोटो)
एआई के हो रहे गलत इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई बी आर गवई ने इसको लेकर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि इस तरह के उपकरणों का इस्तेमाल न्यायतंत्र के खिलाफ भी किया जा सकता है. सीजेआई बी आर गवई ने कहा कि हां-हां हमने भी मॉर्फ किए गए अपने फोटो देखे हैं. सीजेआई ने यह टिप्पणी तब की जब अदालत में यह मुद्दा उठाया गया है किस तरह एआई और डिजिटल टूल्स का दुरुपयोग कर न्यायपालिका और जजों को निशाना बनाया जा रहा हैं.
यह याचिका अधिवक्ता कार्तिकेय रावल ने दायर की है. उन्होंने कहा कि एआई और जेन एआई के बीच अंतर है. जेन एआई नए डेटा के आधार पर फेक तस्वीरें बनाने में माहिर है. इसका भेदभाव और रूढ़िवादी प्रथाओं सहित कई चीजों को बढ़ावा मिल सकता हैं.
सुरक्षा के लिए AI और डिजिटल टूल्स पर नियंत्रण जरूरी
दायर याचिका में अनुरोध किया है कि न्यायपालिका जेनएआई के इस्तेमाल के लिए एक पॉलिसी और एक ढांचा होना चाहिए ताकि एआई के हो रहे दुरुपयोग को रोका जा सके. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि याचिका को खारिज कर दूं या इसे दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए लगाया जाए? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि जेनएआई की ब्लैक बॉक्स प्रकृति और पारदर्शिता की कमी भारतीय न्याय प्रणाली में अस्पष्टता और मनमानी ला सकती हैं, जो अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.
भारत एक्सप्रेस
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