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‘हम उसे इस हालत में नहीं छोड़ सकते’; 31 साल के बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग, सुप्रीम कोर्ट 13 जनवरी को करेगा माता-पिता से बात

सुप्रीम कोर्ट 31 वर्षीय बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग करने वाले बुजुर्ग माता-पिता से 13 जनवरी को बातचीत करेगा. एम्स की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही कोर्ट इस संवेदनशील मामले में कोई अंतिम फैसला लेगा.

सुप्रीम कोर्ट 31 साल के बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग करने वाले बुजुर्ग माता-पिता से 13 जनवरी को बात करेगा. उसके बाद ही कोर्ट कोई अंतिम नतीजे पर पहुचेगा. कोर्ट ने वकीलों से मामले में दिए गए एम्स की रिपोर्ट को अध्ययन करने को कहा है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. वही एम्स ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौप दी है. जिसका अध्ययन करने के बाद कोर्ट अंतिम फैसला लेगा.

पिछली सुनवाई के दौरान नोएडा जिला अस्पताल की एक मेडिकल टीम ने कोर्ट को बताया था कि 31 साल के व्यक्ति के ठीक होने की कोई उम्मीद नही है, जो पिछले 12 वर्षों से पूर्णतः विकलांग है और स्थायी रूप से कोमा जैसी स्थिति में है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उस व्यक्ति की हालत दयनीय है और कुछ करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम उसे इस हालत में जीने नहीं दे सकते.

गाजियाबाद के सीएमओ द्वारा दायर रिपोर्ट की जांच करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह गंभीर बेड सोर से पीड़ित हैं, जिसका अर्थ है कि उनकी ठीक से देखभाल नहीं की जा रही थी. कोर्ट ने कहा था कि सीलबंद लिफाफे में दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था. हरीश जिंदा है उसकी अभी सांसे चल रही है लेकिन वो 11 साल से विस्तर पर पड़ा हुआ है. क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित, यानी 100 फीसदी विकलांगता से ग्रसित है.

माता-पिता की आंखों में चिंता और पीड़ा

याचिका में कहा गया है कि हरीश एक जिंदा कंकाल की तरह 2013 से उसी विस्तर पर यू ही पड़ा हुआ है. माता-पिता का कहना है कि हम हमेशा टी उसके पास नही रहेंगे, तो फिर उसका देखभाल कौन करेगा. राज सैट एयर कैटरिंग लिमिटेड में काम करने वाले पीड़ित के पिता ने बताया हमने एक साल तक हरीश की देखभाल के लिए 27000 रुपये प्रति माह के हिसाब से एक नर्स को रखा था. यह रकम उस समय मेरे 28000 रुपये के मासिक वेतन के लगभग बराबर थी. फिलहाल हरीश का हर महीने का मेडिकल खर्च 20000-25000 रुपये है, जिसमें दवाइयां, खाना और बेडसोर के ईलाज जैसी दूसरी जरूरी चीजें शामिल है.

उनके मुताबिक, सरकार से कोई मदद नही मिल रही है और हम उसके मेडिकल खर्च वहन नहीं कर सकते है. हम ही जानते हैं कि हम कैसे काम चला रहे हैं. हालांकि हरीश के अस्पताल में भर्ती होने पर परिवार को एक बार केंद्र सरकार की योजना से 50000 रुपये की आर्थिक मदद मिली थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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