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सुप्रीम कोर्ट में डॉग लवर्स पर छिड़ी बहस; कपिल सिब्बल बोले- ‘मुर्गियों के लिए चिकन छोड़ दिया’, कोर्ट ने दिया जवाब

आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के बीच बहस देखने को मिली.

आवारा कुत्तों के मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 8 जनवरी को भी सुनवाई जारी रहेगी. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान एक रोचक बहस देखने को मिली है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि “पशु प्रेमी” का मतलब अपने आप “डॉग लवर्स” नही होता है. उन्होंने कहा कि अगर कोई गेटेड सोसाइटी में भैंस पालना चाहे तो क्या होगा? इसका फैसला कौन करेगा. इसपर याचिककर्ताओ के वकील ने दूसरे देश का हवाला देते हुए कोर्ट में आकंड़े पेश किए. इसपर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आप दूसरे देशों की बात कर रहे है तो बताइए सिंगापुर या नीदरलैंड में आपको कितने आवारा कुत्ते दिखते हैं. इसपर सिब्बल ने कहा कि यह मामला विरोधाभासी नही होना चाहिए. मैं सिर्फ कुत्तों से प्रेम करने वालों का नही, बल्कि इंसानों से प्रेम करने वालों का भी प्रतिनिधित्व कर रहा हूं.

जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा कि दूसरे जानवरों का क्या? जैसे मुर्गी या बकरी? इसपर सिब्बल ने कहा कि मैंने चिकन खाना छोड़ दिया है, क्योंकि उन्हें पिंजरों में रखा जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय कुत्तों की देखभाल करता है और वे कई बार खान मार्केट गए हैं, जहां उन्हें कभी कुत्ते ने नही काटा. इसपर कोर्ट ने कहा कि आप और हम शायद खुशकिस्मत हों, लेकिन हर कोई खुशकिस्मत नही है. नेहरू पार्क में भी लोगों को कुत्तों ने काटा है.

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कुत्तों के काटने की घटनाओं से निपटने और आक्रामक कुत्तों के पुनर्वास के लिए कुछ सुझाव दिए है. इसपर जस्टिस मेहता ने हल्के फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि अब बस काउंसलिंग ही बाकी रह गई है. किसी को कुत्तों को भी समझाना चाहिए कि वे लोगों को न काटे. सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि NHAI को एक SOP तैयार करने के लिए कहा गया था, जिसे NHAI ने तैयार कर लिया है. लगभग 1400 किलोमीटर के ऐसे संवेदनशील हिस्सों की पहचान की गई है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एमिकस क्यूरी से पूछा कि कौन-कौन से राज्य है, जिन्होंने जवाब दाखिल नही किया है. इसपर एमिकस क्यूरी ने बताया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब की ओर से अभी तक हकफनामा दाखिल नही किया गया है. एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान और ओडिसा सहयोग नही कर रहे है. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा था हम अगली सुनवाई में वीडियो चलाएंगे और आपसे पूछेंगे कि मानवता क्या है? सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया था कि आवारा कुत्तों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है.

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से आठ सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि किसी भी तरह की ढिलाई बर्दास्त नही की जाएगी. कोर्ट ने कहा था कि आदेश तीन भागों में है. उन्होंने कहा था कि एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट की विषय-वस्तु को हमारे आदेश के अभिन्न अंग के रूप में पढ़ा जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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