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बांग्लादेश निर्वासित गर्भवती महिला को मानवीय आधार पर भारत लाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू

बांग्लादेश निर्वासित की गई गर्भवती महिला और उसके बच्चे को मानवीय आधार पर भारत लाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई शुरू. सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कई सारे सवाल किए. सीजेआई ने कहा कि क्या इसे किसी और दिन रखा जा सकता है?

Edited by Vaibhav Gupta

बांग्लादेश निर्वासित की गई गर्भवती महिला और उसके बच्चे को मानवीय आधार पर भारत लाने की मांग वाली याचिका पर Supreme Court सुनवाई शुरू. सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कई सारे सवाल किए. सीजेआई ने कहा कि क्या इसे किसी और दिन रखा जा सकता है?

कोर्ट ने पूछा कि क्या उनका उचित इलाज हो रहा है? क्या उन्हें किसी वित्तीय सहायता की आवश्यकता है ? वकील ने कहा कि अपने पिता के घर पर हैं, वह दिल्ली में नौकरानी के रूप में काम करती थी. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ 6 जनवरी 2026 को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी.

मामले में एक और महिला

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा कि एक अन्य याचिकाकर्ता के मामले में एक और महिला हैं, जिनके दो बच्चे हैं. मैं उनके बारे में दस्तावेज उपलब्ध करा सकता हूं, कृपया उन्हें प्रथम दृष्टया देख लें.

सीजेआई ने कहा कि दस्तावेज आने के बाद हम देखेंगे कि समयबद्ध तरीके से इसपर क्या प्रक्रिया अपनाई जा सकती है. इसपर हेगड़े ने कहा कि हम आज ही दस्तावेज दे देंगे. वहीं, मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पूछा कि सत्यापन कैसे होगा.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि सीमा के उस पार भारतीयों के लिए मदद बहुत मुश्किल है. सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आधा सच और गलत सूचना जनता की धारणा को प्रभावित करती है.

दिखावटी प्रचार से पूरी तरह मुक्त

वहीं, जस्टिस बागची ने कहा कि हम प्रचार और दिखावटी प्रचार से पूरी तरह मुक्त हैं. बस इतना ही कि इन सब बातों का किसी व्यक्ति के जीवन पर असर नही पड़ना चाहिए. पिछली सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि बांग्लादेश डिपोर्ट की गई गर्भवती महिला सोनाली खातून और उसके 8 साल के बेटे को वापस भारत लाएगा. साथ ही निगरानी में रखते हुए उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी.

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया था कि यह सिर्फ मानवीय आधार पर किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा था कि बेहतर होगा कि उसे पश्चिम बंगाल के बीरभूम में अपने पिता के साथ रहने दिया जाए. गौरतलब है कि सोनाली को दिल्ली पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासी समझकर हिरासत में लिया था और फिर उसे सीमा पार कर बांग्लादेश भेज दिया गया.

वहां गैरकानूनी तरीके से प्रवेश करने के आरोप में सोनाली को जेल में भेज दिया गया. लेकिन पांच महीने बाद 26 वर्षीय सोनाली खातून चपैनवाबगंज जेल से बाहर आ गई है. वह गर्भावस्था के अंतिम चरण में पहुच चुकी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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