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मुजफ्फरनगर थप्पड़ कांड: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को दी पीड़ित छात्र की शिक्षा की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को मुजफ्फरनगर थप्पड़ कांड के पीड़ित छात्र की ट्यूशन, यूनिफॉर्म, किताबें और परिवहन खर्च की जिम्मेदारी सौंपी. TISS काउंसलिंग की सलाह देगा.

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Aarika Singh Edited by Aarika Singh

मुजफ्फरनगर में मुस्लिम छात्र को थप्पड़ मारने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चें की स्कूली शिक्षा पूरी होने तक ट्यूशन फीस, यूनिफॉर्म, किताबें और परिवहन शुल्क का भुगतान करने की प्राथमिक जिम्मेदारी यूपी सरकार की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी राशि के भुगतान के लिए किसी धर्मार्थ ट्रस्ट या संस्था की सहायता लेना राज्य का काम है. इस खर्च को वहन करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य की है. कोर्ट महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

इससे पहले कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगा चुका है. कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले को जिस तरह से संभाला, उसपर उसे गंभीर आपत्ति है. कोर्ट ने कहा था कि शिक्षक एक समुदाय को निशाना बना रहे हैं. हम इसकी गहराई में जाएंगे. कोर्ट ने कहा था कि क्या शिक्षक छात्रों को इसी तरह पढ़ाते है. क्या यही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है? राज्य को इस घटना की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. क्या स्कूल ने बच्चे के लिए कोई परामर्शदाता नियुक्त किया है? यदि ऐसा है घटना हुई है तो इसे राज्य की अंतरात्मा को झकझोर देना चाहिए.

छात्र को थप्पड़ मारने के मामले में जमानत याचिका खारिज

यह एक गंभीर मुद्दा है. हालही में मुजफ्फरनगर की विशेष अदालत ने एक मुस्लिम छात्र को थप्पड़ मारने के मामले में एक स्कूल शिक्षक की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत गठित एक अदालत की विशेष न्यायाधीश अलका भारती ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी इस तरह की राहत के लिए वास्तविक आधार पेश करने में विफल रहा है. बता दें कि होमवर्क न करने पर कथित तौर पर पीड़ित की स्कूली शिक्षिका ने सहपाठियों को बुलाकर उसे थप्पड़ मारने का निर्देश दिया था.

मुजफ्फरनगर जिले के स्कूल की महिला शिक्षक पर पीड़ित लड़के पर साम्प्रदायिक गालियां देने का भी आरोप लगाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने घटना में शामिल बच्चे और उसके सहपाठियों की काउंसलिंग के तरीके पर सुझाव देने के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) मुंबई को नियुक्त किया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी पक्षों के वकीलों को सुनने के बाद अदालत का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार और विशेष रूप से शिक्षा विभाग ने समय-समय पर इस अदालत द्वारा पारित विभिन्न आदेशों पालन नही किया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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