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आई-पैक मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ED के आरोपों को बताया फर्जी, पुलिस कमिश्नर बोले- ‘ED अधिकारियों को रिट याचिका का हक नहीं’

पश्चिम बंगाल ‘आई पैक’ मामले में राज्य सरकार, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट में ईडी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जवाब दाखिल किया है.

पश्चिम बंगाल आई पैक मामले में पश्चिम बंगाल सरकार, डीजीपी और और पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अपना जवाब दाखिल कर दिया हैं. राज्य सरकार सहित तीनों ने ईडी द्वारा दाखिल याचिका में लगाए गए आरोपों को फर्जी और बनावटी बताया है. पुलिस कमिश्नर ने ईडी अधिकारियों की ओर से रिट याचिका दायर करने पर सवाल उठाया है. अपने जवाब में कहा है कि ईडी अधिकारी रिट याचिका दाखिल नहीं कर सकते, उनके नागरिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है.

दायर हलफनामे में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देकर ईडी के अधिकारियों की ओर से निजी तौर पर दाखिल रिट याचिका को खारिज करने की मांग की है. हलफनामे में कहा गया है कि रेड मारने गए छलावा कर रहे थे, हथियार होने के बावजूद पहचान छिपा रहे थे, ऐसे में क्षेत्रीय पुलिस ने सूचना मिलने के बाद कदम उठाया था. मुख्यमंत्री मौके पर पहुच गई थी और उनकी सुरक्षा के मद्देनजर कमिश्नर होने के नाते वहां पहुचा था, यह मेरी जिम्मेदारी और कर्तव्य है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की ओर से दायर याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था.

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार

कोर्ट 3 फरवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने सीसीटीवी कैमरा सहित अन्य सामग्री को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. ईडी ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर पर रोक लगाने की मांग की है. टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा था कि ममता बनर्जी ने सिर्फ लैपटॉप और मोबाइल को लिया है. क्योंकि उसमें पार्टी से संबंधित जानकारी है. ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यह बहुत शॉकिंग घटना है. जहां ईडी की छापेमारी चल रही थी, वहां खुद मुख्यमंत्री पहुच गई और जांच में व्यवधान डाला. जबकि पीएमएलए की धारा 17 के तहत यह कार्रवाई की जा रही थी.

एसजी मेहता ने कहा था कि यह एक चुकाने वाला पैटर्न है. जब कोई वैधानिक प्राधिकरण अपना काम कर रहा था, उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दखल देती है. उन्होंने कहा था कि इससे पहले पुलिस आयुक्त मुख्यमंत्री के साथ धरना पर बैठ गए थे. इसपर जस्टिस मिश्रा ने पूछा था यह कैसे मान्य है? एसजी मेहता ने कहा कि ईडी की शिकायत है, एक पीड़ित और एक दो अधिकारियों की. यह भी कहा जा रहा है कि जहां संयुक्त निदेशक के घर का घेराव किया गया. लोगों ने घबराकर फोन किया. एसजी मेहता ने कहा था कि ममता बनर्जी ने सारी फाइलें जब्त कर लीं. यह चोरी है. उन्होंने एक ईडी अधिकारी का फोन भी ले लिया.

आदेश में दर्ज हुई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

एसजी मेहता ने मुख्य सचिव और विभागीय अधिकारियों को भी पक्षकार बनाने की मांग कर रहा हूं. मेहता ने कहा था कि जज ने अपने आदेश में क्या टिप्पणी की है. इसमें बड़ी संख्या में वकीलों के इकठ्ठा होकर हंगामा करने का जिक्र है. उन्होंने कहा था कि अदालत का माहौल सुनवाई के लिए अनुकूल नही था. एसजी मेहता ने कहा था कि बकायदा भारी भीड़ इकट्ठाके लिए मैसेज किया गया था.

इसपर कोर्ट ने पूछा हाई कोर्ट को जंतर-मंतर बना दिया गया था? वही अन्य टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कपिल सिब्बल ने कहा था कि यहां जानकारी की कलरिंग की जा रही है. कोर्ट ने कहा था कि हम इससे बहुत व्यथित है कि हाई कोर्ट को सुनवाई नही करने दी गई.

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-भारत एक्सप्रेस



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