यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है. कोर्ट ने आसाराम को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि वह आसाराम की नियमित जमानत पर विचार नहीं करेगा. हालांकि, कोर्ट ने आसाराम को उचित मेडिकल सुविधा मुहैया कराने का आदेश दिया है. जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यह आदेश जारी किया है.
कैद में भी मौलिक अधिकारों की रक्षा पर जोर
आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था. हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट ने 4 जून 2026 को आसाराम की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए जेल प्रशासन को उन्हें उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था.
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि यदि आसाराम की तबीयत अधिक खराब होती है, तो उन्हें आयुर्वेद अस्पताल में इलाज कराने की छूट दी जाएगी. कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी कैदी के मौलिक अधिकार केवल इस आधार पर समाप्त नहीं हो जाते कि उसकी अपील का निस्तारण हो चुका है. इसी को आधार बनाते हुए कोर्ट ने जेल प्रशासन को आसाराम को कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था.
पूर्व में मिली अंतरिम राहत और अदालती फैसलों का ब्योरा
आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से पहली बार 7 जनवरी 2025 को स्वास्थ्य आधार पर 31 मार्च 2025 तक अंतरिम जमानत मिली थी. बाद में इस अवधि को बढ़ा दिया गया और 29 अक्टूबर 2025 को उन्हें छह महीने की और अंतरिम जमानत प्रदान की गई. आसाराम बापू को गांधीनगर की सेशन कोर्ट ने 2013 के बलात्कार के मामले में 2023 को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च तक मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी थी, जिसकी अवधि खत्म होने के बाद गुजरात हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत की अवधि को 30 जून तक बढ़ा दिया था. इस मामले में आसाराम को 31 अगस्त 2013 को गिरफ्तार किया गया था, तब से वह इस मामले में जेल में हैं.
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पंचकर्म थेरेपी के लिए मांगी थी 6 महीने की राहत
आसाराम बापू ने हाई कोर्ट में छह महीने की अंतरिम जमानत की मांग करते हुए (उनके वकील के माध्यम से) कहा था कि डॉक्टरों ने पंचकर्म थेरेपी की सलाह दी है, जो 90 दिन की होती है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका था कि वह सिर्फ मेडिकल शर्तों पर ही विचार करेगा. इससे पहले, गुजरात हाई कोर्ट आसाराम की उस याचिका को 29 अगस्त को खारिज कर चुका था, जिसमें निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निलंबित करने की मांग की गई थी.
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