Adani Realty Project Manager Murder Case: गुरुग्राम में अडानी रियल्टी के प्रोजेक्ट मैनेजर की हत्या के मामले ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है. इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर और गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को करेगी.
लापता युवक का मिला शव
जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ रही है, आरोपी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा की ठगी के कारनामों की पोल खुलती जा रही है. सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा कि दिल्ली निवासी लापता युवराज सिंह मनचंदा का शव जब गुरुग्राम में मिला, तो पुलिस उसकी पहचान क्यों नहीं कर सकी? इतना ही नहीं, बिना शिनाख्त किए इतनी जल्दबाजी में उसका अंतिम संस्कार क्यों कर दिया गया? सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल दागा कि अज्ञात शव मिलने की सूचना नेशनल पोर्टल पर तुरंत क्यों अपलोड नहीं की गई.
मानव तस्करी कमेटी की रिपोर्ट से हुआ खुलासा
मानव तस्करी मामलों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी की अध्यक्ष वरिष्ठ वकील मुक्ता गुप्ता ने कोर्ट को चौकाने वाली जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दिल्ली से लापता एक व्यक्ति की खोजबीन के दौरान पता चला कि तीन दिन बाद ही उसकी पहचान गुरुग्राम में मिले उस शव के रूप में हुई, जिसका पुलिस अज्ञात मानकर अंतिम संस्कार कर चुकी थी.
लापता लोगों की FIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
शीर्ष अदालत ने याद दिलाया कि 22 मई को ही पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि चाहे बच्चा हो, बुजुर्ग हो या महिला-पुरुष, किसी के भी लापता होने पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए. देश में फिलहाल 47,000 से अधिक बच्चे लापता हैं, जिसको लेकर कोर्ट बेहद सख्त है. वहीं, गुरुग्राम की निचली अदालत ने भी पुलिस कमिश्नर को शव मिलने से लेकर अंतिम संस्कार तक के तमाम मेडिकल और जांच रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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