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ईडी के अधिकारों को लेकर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने निदेशालय को नोटिस भेज मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है, कि क्या ईडी संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकती है? तमिलनाडु और केरल सरकारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने नोटिस जारी किया है.

Supreme Court Notice to Enforcement Directorate
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और केरल सरकारों की ओर से दायर याचिकाओं पर प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है. लेकिन कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

क्या ED को रिट दाखिल करने का अधिकार?

दायर याचिकाओं में अहम सवाल उठाया गया है कि क्या ईडी को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करने का अधिकार है. कोर्ट ने जस्टिस शर्मा ने कहा कि केरल हाई कोर्ट का आदेश अंतरिम प्रकृति का है.

इसपर केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि केरल राज्य के संदर्भ में यह आदेश अंतिम प्रभाव वाला है, क्योंकि इससे मूल प्रश्न तय हो जाता है कि क्या ईडी जैसे विभाग को अनुच्छेद 226 के तहत रिट दाखिल करने का अधिकार है?

केरल हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

कपिल सिब्बल ने आगे ये यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि क्या मामला चीफ कांसेर्वटर ऑफ फारेस्ट फैसले और अनुच्छेद 131 व 226 के आपसी संबंध के दायरे में आता है. केरल सरकार ने 26 सितंबर 2025 के केरल हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है.

राज्य सरकार ने दावा किया कि ईडी केंद्र सरकार का विभाग है और ऐसे में वह रिट याचिका दाखिल नही कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि सोना तस्करी के पीछे राजनीतिक साजिश का पता लगाने के लिए जांच आयोग गठित करने का आदेश जारी किया गया था.

ED एक वैधानिक निकाय

केरल हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा था कि ईडी सिर्फ केंद्र सरकार का विभाग ही नहीं, बल्कि एक वैधानिक निकाय है. वैधानिक निकाय को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल करने का अधिकार है.

कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले में साजिश के.सवाल का विशेष अदालत परीक्षण करेंगी, जो जांच की निगरानी कर रही है. अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि क्या प्रवर्तन निदेशालय जैसे केंद्रीय जांच एजेंसी को अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं.

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-भारत एक्सप्रेस



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