सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद पर कहा- वीडियोग्राफी की आपत्तियां हाईकोर्ट ही तय करेगा.
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर हिंदू पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है. हिंदू पक्ष की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट को बताया कि 23 जनवरी यानी शुक्रवार को बसंत पंचमी है. लिहाजा मुस्लिमों को नमाज पर रोक लगाई जाए और सिर्फ हिंदुओं को ही सरस्वती की पूजा-अर्चना करने की इजाजत दी जाए. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ 22 जनवरी को सुनवाई करेगा.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का आदेश
यह याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में कहा गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 07 अप्रैल 2023 को जारी आदेश के मुताबिक, भोजशाला में हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा की इजाजत है.
वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को दोपहर 01 से 03 बजे के बीच नमाज पढ़ सकते है. लेकिन एएसआई के इस आदेश में यह साफ नहीं है कि अगर बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन होगी तो क्या होगा. यह याचिका वकील विष्णु शंकर जैन की ओर से दायर की गई है.
बसंत पंचमी के दिन नमाज नहीं
दायर याचिका में कहा गया है कि मां सरस्वती का यह मंदिर परमार राजा भोज ने 11 वीं शताब्दी में बनाया था. अदालत के आदेश पर हुए सर्वे में भी यहां मंदिर होने की पुष्टि हुई है. ऐसे में एएसआई का आदेश ही अपने आप में गलत है, लेकिन बसंत पंचमी का दिन तो मां सरस्वती की पूजा अर्चना का दिन है. उस दिन हवन, पूजा और महाआरती जैसे जरूरी धार्मिक कर्म संकल्प से पूर्णाहुति तक बिना किसी व्यवधान के होने चाहिए. ऐसे में उस दिन नमाज की इजाजत नहीं होनी चाहिए.
क्यों हो रहा विवाद?
धार में साल 2006, 2012 और 2016 में शुक्रवार को वसंत पंचमी आई तो विवाद की स्थिति बनी. वसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को पूजा जबकि शुक्रवार होने से मुस्लिमों को नमाज की अनुमति है.
ऐसे में वसंत पंचमी शुक्रवार को आने पर समझाइश के बाद पूजा और नमाज दोनों करवाए जाते है. शुक्रवार के दिन लगभग तीन हजार मुस्लिम नमाज अदा करते है.
-भारत एक्सप्रेस
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