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सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों को सजा पूरी कर चुके कैदियों को रिहाई का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्या मामले के दोषी सुखदेव पहलवान को रिहा करने का आदेश दिया और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि सजा पूरी कर चुके कैदियों को तुरंत रिहा किया जाए.

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों को सजा पूरी कर चुके कैदियों को रिहाई का दिया आदेश

नीतीश कटारा हत्या मामले में दोषी सुखदेव पहलवान के रिहाई से संबंधित मामले में Supreme Court ने विस्तार से अपना फैसला दिया है. कोर्ट ने सुखदेव पहलवान को रिहा करने का आदेश देते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है.

कोर्ट ने गृह सचिवों को दिया निर्देश

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस के वी विश्वनाथन की पीठ ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे यह पता लगाए कि क्या कोई दोषी अपनी सजा की अवधि से अधिक समय तक जेल में सजा काट रहा है. कोर्ट ने सजा पूरी करने के बाद भी जेल में बंद कैदियों पर चिंता व्यक्त की है. साथ ही निर्देश दिया कि निर्धारित कारावास अवधि की सजा काट चुके सभी दोषियों को तत्काल रिहा किया जाए.

कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि ऐसा कोई दोषी जेल में है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए. यदि किसी अन्य मामलों में वांछित नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह आदेश राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को भेजा जाए, ताकि राज्यों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को भेजा जा सके. कोर्ट ने कहा कि 20 साल जैसी निश्चित अवधि के लिए उम्रकैद की सजा पाए दोषी को सजा पूरी होने के बाद जेल से रिहा किया जा सकता है.

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20 साल के बाद स्वतः रिहाई नहीं हो सकती-अर्चना दवे

वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना दवे ने कहा कि 20 साल के बाद स्वतः रिहाई नहीं हो सकती और आजीवन कारावास का अर्थ है शेष प्राकृतिक जीवन तक जेल में रहना. कोर्ट ने सुखदेव पहलवान को टिप्पणी करते हुए कहा था कि सजा समीक्षा बोर्ड न्यायिक प्राधिकारी के आदेश को कैसे दबा सकता है? कोर्ट ने कहा था कि अगर यही रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा.

कोर्ट ने कहा था कि क्या यह न्यायपालिका का आचरण है. इससे पहले सजा समीक्षा बोर्ड के सुखदेव पहलवान के आचरण का हवाला देते हुए सजा माफी से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने एसआरबी की कार्रवाई पर भी आश्चर्य व्यक्त किया है. कोर्ट ने कहा था कि वह अदालत द्वारा पारित आदेश पर कैसे रोक लगा सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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