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सुप्रीम कोर्ट ने भूमि विवाद में फर्जीवाड़े पर फैसला रद्द किया, CBI जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी वकील और जाली समझौते के खुलासे पर भूमि विवाद का फैसला रद्द किया. रजिस्ट्री को जांच का आदेश, दोषियों पर FIR संभव. CBI जांच की मांग.

Supreme Court
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

सुप्रीम कोर्ट ने फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद भूमि विवाद मामले में दिया गया फैसला वापस ले लिया है. आरोप लगाया गया है कि एक पक्षकार ने फर्जीवाड़ा करके कोर्ट में दूसरे पक्षकार की ओर से फर्जी वकील पेश कर कोर्ट का आदेश हासिल कर लिया. जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को मामले की आंतरिक जांच कर तीन सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चेतावनी दी है कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जा सकता है.

दूसरे पक्षकार हरीश जायसवाल की ओर से पेश वकील ज्ञानंत सिंह और अभिषेक राय ने कोर्ट से 13 दिसंबर 2024 के आदेश वापस लेने का अनुरोध किया और कोर्ट को बताया कि उसने न तो कोई समझौता किया है और न ही सुप्रीम कोर्ट में किसी वकील को प्रतिनिधित्व के लिए नियुक्त किया. यह भी सामने आया कि जिस वकील को प्रतिनिधित्व के लिए नियुक्त किया. यह भी सामने आया कि जिस वकील ने कथित तौर पर उस नकली पक्ष की ओर से पेशी की थी, वह अब वकालत नहीं करते है और उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं थी.

उन्होंने यह भी कहा कि उनका मुवक्किल हरीश जायसवाल ने न तो सुप्रीम कोर्ट में कोई वकील नियुक्त किया है और ना ही बिपिन बिहारी सिन्हा उर्फ बिपिन प्रसाद सिंह के साथ कोई समझौता नही किया था. आरोप लगाया कि बिपिन बिहारी सिन्हा उर्फ बिपिन प्रसाद सिंह ने फर्जीवाड़े करके सुप्रीम कोर्ट का आदेश हासिल किया है. फर्जीवाले का एक आरोप लगाने वाले अर्जीकर्ता जिनकी उम्र 90 वर्ष से ज्यादा है, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में मौजूद थे.

सुप्रीम कोर्ट के साथ भी किया धोखा

उनके वकील का कहना था कि इस मामले में नीचे की दोनों अदालतों और पटना हाई कोर्ट ने उनके हक में फैसला दिया था और बिपिन बिहारी सिन्हा की याचिका खारिज कर दिया था. वकीलों ने कहा कि उस याचिका में बिपिन बिहारी सिन्हा ने जमीन बिक्री समझौता होने का दावा किया था और जमीन की कीमत 63000 रुपये भुगतान करने के बावजूद बिक्री डीड न करने का आरोप लगाया था. प्रतिवादी की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने न केवल कानून और नैतिकता का उल्लंघन किया है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के साथ भी धोखा किया है.

यदि इस धोखाधड़ी को सुधारा नहीं गया तो ऐसे दुर्भावनापूर्ण याचिकाकर्ता भविष्य में भी न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास करते रहेंगे. ऐसा नही है कि सुप्रीम कोर्ट में पहली बार इस तरह के फर्जीवाड़ा देखने को मिल रहा हो इससे पहले नीतीश कटारा मामले में गवाह भगवान सिंह के नाम से झूठी याचिका दाखिल करने के मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया दे चुका है.

इस मामले में प्रतिवादी सुखपाल, रिंकी और उनके सहयोगियों ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को धोखा देने और न्याय प्रणाली की साख को दांव पर लगाने की कोशिश की है, क्योंकि उन्होनें हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले दस्तवेज़ों को जाली बनाने के साथ भगवान सिंह के नाम पर उनकी जानकारी, सहमति के बिना दाखिल की गई झूठी कार्यवाही की साजिश की. लिहाजा इसकी जांच पड़ताल सीबीआई को सौंपना उचित हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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