सुप्रीम कोर्ट ने बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 को रद्द करने से संबंधित दायर याचिका पर जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशनिंग कर वकील ने कहा कि मामला 2013 और 2018 में अंतिम निपटारे के लिए रखा गया था, लेकिन फैसला नहीं हुआ.
उन्होंने कहा कि मामला अभी भी सूचीबद्ध नहीं है, कोई तारीख तय करें. इसपर सीजेआई बी आर गवई ने कहा कि हम इस पर गौर करेंगे. इससे पहले कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. यह जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी किया था.
बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति में 8 सदस्य
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि इस तरह की याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. यह याचिका बिहार के गया जिले स्थित महाबोधि मंदिर के उचित प्रबंधन, नियंत्रण और प्रशासन की मांग की गई है.
1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम ने बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति की स्थापना की, जिसमें चार बौद्ध और चार हिंदू सदस्य शामिल हैं, और गया जिला मजिस्ट्रेट इसके पदेन अध्यक्ष हैं. ऐतिहासिक रूप से अधिनियम में यह प्रावधान था कि अध्यक्ष हिंदू होना चाहिए, जिसे 2013 में संशोधित कर गैर-हिंदू जिला मजिस्ट्रेट को भी अध्यक्ष बनाने की अनुमति दी गई.
अधिनियम संविधान के अनुच्छेदो का करता है उल्लंघन
हालांकि अखिल भारतीय बौद्ध फोरम जैसे बौद्ध समूहों का कहना है कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 25, अनुच्छेद 26, अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक मामलों को बिना किसी बाधा के प्रबंधन करने का अधिकार सुनिश्चित करता है. अधिवक्ता आनंद जोंधले के अनुसार यह मामला सिर्फ कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अरबों-खरबों के घोटाले और बौद्ध विरासत की लूट से जुड़ा है.
13वीं शताब्दी तक बौद्ध धर्म के लोगो ने किया प्रबंधन
महाबोधि मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 13वीं शताब्दी तक मंदिर का प्रबंधन बौद्ध धर्म मानने वालों के हाथ में था. लेकिन तुर्क आक्रमणकारियों के आगमन के बाद और 1590 में घमंडी गिरी नाम के एक सन्याशी के गया पहुचने तक इसका प्रबंधन किसके हाथ में था इसका पता नहीं चल पाया है.
बता दें कि महंत घमंड गिरी ने बोधगया मठ की स्थापना की. इसके बाद यह एक हिंदू मठ बन गया. गिरी के वंशज आज भी महाबोधि मंदिर के प्रबंधन में शामिल हैं. वो इसे एक हिंदू धार्मिक स्थल बताते है. वो गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का 9 वां अवतार मानते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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