Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

सुप्रीम कोर्ट ने तिरंगे के राजनीतिक या धार्मिक इस्तेमाल पर रोक की याचिका खारिज की, कहा– नीतिगत मामला…

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक और धार्मिक उद्देश्यों से तिरंगे के इस्तेमाल पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि यह नीतिगत मामला है और इसमें न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं…

National Flag Misuse

National Flag Misuse: सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक या धार्मिक मकसद से राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह नीतिगत मामला है. इसमें कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता है. जस्टिस जे बी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ दल तो यह आजादी के पहले से कर रहे है.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कांग्रेस पार्टी द्वारा तिरंगे के साथ अपने चुनाव चिन्ह के उपयोग का उदाहरण दिया तो, कोर्ट ने कहा कि नीतिगत मामला है, इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है. दायर याचिका में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई थी. याचिका में कहा गया था कि वे राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम और ध्वज संहिता 2002 को सख्ती से लागू करें, साथ ही तिरंगे की गरिमा को सुरक्षित करने की मांग की गई थी.

कांग्रेस के तिरंगे उपयोग का दिया गया उदाहरण

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग सहित प्रतिवादियों को एक उचित रिट, आदेश या निर्देश जारी करने की मांग की गई थी, ताकि किसी भी राजनीतिक दल या धार्मिक संगठन राष्ट्रीय ध्वज का राजनीतिक या धार्मिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल ना कर सके. याचिका में यह भी कहा गया था कि राष्ट्रीय ध्वज पर पार्टी का लोगों, धार्मिक प्रतीक या किसी प्रकार का लेख अंकित कर करना असंवैधानिक है और राष्ट्रीय ध्वज के गरिमा के खिलाफ है.

याचिका में राजनीतिक रैलियों, धार्मिक आयोजनों या चुनाव प्रचार के दौरान तिरंगे का इस्तेमाल करने से रोकने की मांग की गई थी. 23 दिसंबर 1971 को इसको लेकर कानून बना था. जिसके अंतर्गत किसी भी सार्वजनिक स्थान पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज या संविधान या उसके किसी भी भाग का अपमान करने पर तीन साल की कैद जुर्माना या फिर दोनों सजाए एक साथ दी जा सकती है.

अपमान का मतलब यह है कि यहां जलाने या मूल स्वरूप को बिगाड़ने फाड़ने या गंदा करने सहित किसी भी अपमानित करना है. सेक्शन 4 डी में साफ लिखा है कि राजकीय अंतिम संस्कारों और आर्म्ड फोर्स पैरामिलिट्री फोर्स को छोड़कर किसी भी अंतिम संस्कार में राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल करना अपमान माना जाएगा.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों के बाहर QR कोड अनिवार्य करने के फैसले को दी मंजूरी

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital