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आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत नही, कोर्ट ने याचिका को खारिज किया

उत्तर प्रदेश सरकार ने कम छात्रों वाले 105 स्कूलों को अन्य विद्यालयों में विलय करने का फैसला किया है. इस फैसले के खिलाफ आप सांसद संजय सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी और हाई कोर्ट जाने को कहा.

Supreme Court
Edited by Radha Priya

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में मर्जर नीति के खिलाफ आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए जी मसीह की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए संजय सिंह को हाई कोर्ट जाने को कहा है.

संजय सिंह ने दायर याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को मनमाना, असंवैधानिक और बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के विपरीत बताया था. संजय सिंह ने दायर याचिका में 16 जून के सरकारी आदेश और 24 जून को जारी की गई परिणाम सूची को चुनौती दी गई थी.

याचिका में कहा गया था कि बिना किसी वैधानिक आधार स्कूल बंद कर दिया गया है और उनका विलय कर दिया गया है. सरकार के इस फैसले से बच्चों को संविधान के अनुच्छेद 21ए (6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार) का उल्लंघन करते हुए अनुचित दूरी तय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

ये भी पढ़ें- सात बार से सांसद रहे मोहन डेलकर आत्महत्या मामले में दर्ज FIR को रद्द करने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, 105 स्कूल होंगे मर्ज

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार कम छात्र संख्या वाले 105 स्कूलों को अन्य विद्यालयों में विलय करने का फैसला किया गया है. जिससे हजारों बच्चे स्कूल छोड़ने को.मजबूर होंगे और उन्हें दूर के स्कूलों में पढ़ने के लिए जाना पड़ेगा. याचिका में कहा गया है कि 2009 के शिक्षा अधिकार अधिनियम और राज्य सरकार के नियमों के मुताबिक एक किलोमीटर के दायरे में स्कूल न होने की स्थिति में 300 से अधिक जनसंख्या वाली बस्ती में स्कूल स्थापित किया जाना चाहिए.

ऐसे में स्कूलों का यह विलय शिक्षा व्यवस्था को सीधे प्रभावित करेगा. सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षक संगठनों ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया है. वही सरकार की दलील है कि मर्ज करने से बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा. यदि किसी स्कूल के रास्ते में नाला, नदी या रेल पटरी जैसी बाधाएं हैं, तो उसे भी मर्ज किए जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस 



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