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8 साल पुराने यमुना विवाद में आया मोड़, जानिए क्यों SC ने रद्द किया ₹5 करोड़ का फाइन

Yamuna Pollution Case: यमुना फ्लडप्लेन में 2016 के कार्यक्रम को लेकर एनजीटी द्वारा आर्ट ऑफ लिविंग पर लगाया गया 5 करोड़ का जुर्माना सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है.

Supreme Court

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर कर चुनावी वादों के वित्तीय प्रभाव, मुफ्त की रेवड़ियों पर रोक और घोषणापत्रों के लिए एक निश्चित प्रारूप लागू करने की मांग की है. (PC: भारत एक्सप्रेस)

Edited by Shubhra Rai

Yamuna Pollution Case: सुप्रीम कोर्ट से ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने 2016 में दिल्ली यमुना के बाढ़ वाले इलाके में हुए एक कार्यक्रम के लिए संगठन और उससे जुड़ी संस्थाओं पर लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया है. जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह फैसला सुनाया है.

बाढ़ वाले इलाके को ठीक करने का काम जारी रखेगा

कोर्ट ने डीडीए को आदेश दिया कि वह संगठन द्वारा जमा किए गए 5 करोड़ रुपए के जुर्माने की रकम को वापस करें. कोर्ट ने कहा कि डीडीए पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इलाके की सुरक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है. लेकिन इस बात का कोई सीधा सबूत नहीं मिला कि आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम से यमुना के बाढ़ वाले इलाके को कोई नुकसान पहुचा हो. हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि डीडीए, एनजीटी के निर्देशों के अनुसार बाढ़ वाले इलाके को फिर से ठीक करने का काम जारी रखेगा.

कार्यक्रम के बाद 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया

बता दें कि एनजीटी ने यमुना के बाढ़ वाले इलाके में हुए कार्यक्रम के बाद 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था. एनजीटी ने यमुना नदी के किनारे विश्व सांस्कृतिक समारोह के आयोजन के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था. समारोह स्थल की जांच के लिए प्रोफेसर सीआर बाबू की अध्यक्षता में एक टीम बनाई थी. जुर्माना लगाए जाने के बाद श्री श्री रविशंकर ने कहा था, हमने कुछ भी गलत नही किया है. हम जेल जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन जुर्माना नहीं देंगे.

मनोज मिश्रा ने कार्यक्रम की वैधता पर सवाल उठाया

उन्होंने ट्वीटर पर लिखा, ‘हमन इस निर्णय से संतुष्ट नहीं है. हम अपील करेंगे. सत्यमेव जयते.’ याचिकाकर्ता यमुना जिये अभियान के मनोज मिश्रा ने कार्यक्रम की वैधता पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि क्षेत्र को प्रत्येक पल नष्ट किया जा रहा है और उसे उबरने में लंबा समय लगेगा. मिश्रा ने आयोजकों को उनकी समझ की कमी को लेकर आड़े हाथ लिया था. एनजीटी ने.सवाल उठाते हुए पूछा था कि विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के लिए किसने मंजूरी दी है, जिसमें लगभग 35 लाख लोगों की संभावना है.

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-भारत एक्सप्रेस



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