सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मजनू के टीला इलाके में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के मामले में केंद्र सरकार से अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि जब आपने उन्हें भारतीय नागरिकता दे दी है, तो क्या उन्हें रहने के लिए आवासीय सुविधाएं भी नहीं मिलनी चाहिए. अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि इस मुद्दे पर उच्चतम स्तर पर विचार कर कोई समाधान निकाला जाए.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से मंथन करे. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से चार सप्ताह का समय मांगा है. जिसे अदालत ने.स्वीकार कर लिया है. तब तक शरणार्थियों की बेदखली पर रोक जारी रहेगा.
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दिया था. हाई कोर्ट ने मंजनू का टीला स्थित पाकिस्तानी-हिंदू शरणार्थी शिविर को वैकल्पिक व्यवस्था होने तक नहीं तोड़ने के डीडीए को निर्देश देने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें और इसी तरह के अन्य शरणार्थियों को इस क्षेत्र में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि पाकिस्तानी शरणार्थियों को उनकी विदेशी राष्ट्रीयता के कारण डीयूएसआईबी नीति के तहत पुनर्वासित नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने याचिककर्ताओ और उसी तरह के अन्य शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता लेने के लिए सीएए 2019 की धारा 10 ए के तहत आवेदन करने की सलाह दी थी. साथ ही कहा था कि भारतीय नागरिक बन जाने के बाद वे सभी यहां के लोगों की तरह अधिकारों का लाभ ले सकेंगे.
आश्रय में बसे शरणार्थियों को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
इसके लिए वे दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव से संपर्क कर सकते है. पिछले 20 साल से पाकिस्तान से आए 300 हिंदू शरणार्थी यहां रह रहे है. वे इस उम्मीद के साथ भारत आए हैं कि उन्हें भारतीय नागरिकता मिल जाएगी. हाई कोर्ट के आदेश के बाद इन तमाम परिवारों पर बेदखली का तलवार लटकती रही है. लेकिन इन लोगों को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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