लोधी कालीन स्मारक “शेख अली की गुमटी” के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एमसीडी को आड़े हाथ लिया है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कोई वीआईपी व्यक्ति आने.वाला होता है कि आप दो घंटे में शेख अली की गुमटी के आसपास सफाई कर देंगे.
यह टिप्पणी जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एस वी एन भट्टी की बेंच ने की है. दरअसल मामले की सुनवाई के दौरान सफाई न होने के मामले में एमसीडी कमिश्नर को तलब किया था.
खुद को रोकना बहुत मुश्किल
कोर्ट ने एमसीडी कमिश्नर को कमियों को दूर करने के लिए एक्शन प्लान बनाने को कहा है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति आने वाला है तो आप दो घंटे में इसे साफ कर देंगे, क्या यही हमारे आदेशों का सम्मान करते है? खुद को रोकना बहुत मुश्किल है, लेकिन क्या आप इसी तरह का व्यवहार करते है आपको लगता है कि पुरातत्व विभाग इस काम को करेगा, कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या यह आपके अहंकार का प्रदर्शन है? कोर्ट ने स्थिति पर नजर रखने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त करने को कहा है.
विभागों को समन्वय करने का निर्देश
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि “शेख अली की गुमटी” परिसर के अंदर स्थित पार्क का इस्तेमाल बास्केटबॉल या बैडमिंटन के लिए नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने अपने आदेश में पार्कों के सौंदर्यीकरण और रखरखाव के लिए बागवानी विभाग सहित अन्य विभागों को समन्वय करने का निर्देश दिया था.
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि स्मारक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की वाणिज्यिक गतिविधियों जैसे कि दुकान या स्टॉल नही लगाई जाएगी. इससे पहले कोर्ट ने “शेख अली की गुमटी” को कानून के तहत संरक्षित स्मारक घोषित करने के लिए एक नई अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया था. यह पुरातात्विक महत्व का 500 साल पुराना मकबरा है. इस पर डिफेंस कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन, दिल्ली ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था. साथ ही यहां दिल्ली नगर निगम एक अनधिकृत कार्यालय और पार्किंग संचालित करता था.
डिफेंस कॉलोनी के निवासी ने दायर की थी याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 2019 में याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. एएमएएसआर अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारकों को कानूनी संरक्षण प्रयासों और उनके आसपास की गतिविधियों पर प्रतिबंधों का लाभ मिलता है. बता दें कि यह याचिका डिफेंस कॉलोनी के निवासी राजीव सूरी ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने शेख अली की गुमटी को प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित स्मारक घोषित करने की मांग की थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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