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धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर हो सख्त एक्शन, पर सीधे SC आना सही नहीं; जानें पैगंबर विवाद पर अदालत ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणी से जुड़ी एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हर मामले को सीधे सर्वोच्च अदालत में लाने की आदत ठीक नहीं है. कोर्ट ने कहा कि देश की कानूनी प्रक्रिया के तहत सबसे पहले पुलिस और निचली अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए

Supreme Court
Edited by Vaibhav Gupta

पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत से कहा कि यह मामला देश में सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका का निपटारा कर दिया है.

कार्रवाई न हो तभी खटखटाए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने पूछा कि क्या इस संबंध में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई है. उन्होंने कहा कि कानून के तहत पहले उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि यदि निचले स्तर पर कार्रवाई नहीं होती तभी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए. जस्टिस अमानुल्लाह ने यह भी कहा कि हर मामले सीघे सुप्रीम कोर्ट लाने की प्रवृति ठीक नही है.

नीचली अदालतों की भूमिका होगी प्रभावित

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने याचिकाकर्ता से कहा कि हमारी व्यवस्था पर भरोसा रखिये. अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ी अदालत है और उसकी भूमिका निगरानी की है. यदि हर मामले सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाया जाएगा तो निचली अदालतों की भूमिका प्रभावित होगी.

उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील घटनाओं को सनसनीखेज बनाने से बचना चाहिए. यदि किसी व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

क्या था मामला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, नाजिया इलाही खान ने जून में एक पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर मोहम्मद और उनके परिवार के खिलाफ कुछ अपमानजनक टिप्पणियां की थी. जिसके बाद इसकी क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. घटना सामने आने के बाद इंफ्लुएंसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.

मामले को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम सौंपे गए ज्ञापन में संबंधित व्यक्ति की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच तथा कानून के अनुरूप सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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