सुप्रीम कोर्ट संदेसरा ब्रदर्स के स्टर्लिंग ग्रुप से जुड़े बहुचर्चित 14000 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में 10 अप्रैल को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान सेवी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जूनियर ने पेश होकर कहा कि मामले में अभी तक जवाब दाखिल नही हुआ है. लिहाजा जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाए. जिसके बाद कोर्ट ने एक सप्ताह का समय दे दिया है.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दो आरोपियों हेमंत एस. हाथी और चेतन जयंतीलाल संदेसरा के खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक और दीवानी मुकदमे 17 दिसंबर 2025 तक 5100 करोड़ रुपए बैंकों को जमा करने की शर्त पर रद्द कर दिया है. जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने पिछली सुनवाई में पाया था कि अदालत की 16 दिसंबर की कार्यालय रिपोर्ट में जमा राशि का सत्यापन किया गया था और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने इसपर कोई आपत्ति नही जताई थी.
इसे देखते हुए कोर्ट ने अदालत के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया था कि वह उचित सत्यापन के बाद ऋणदाता बैंकों को आनुपातिक आधार पर 5100 करोड़ रुपए का वितरण करें.
वित्तीय जांचों में देरी बर्दाश्त नहीं होगी- कोर्ट
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सेबी को 2 अप्रैल तक भगोड़े संदेसरा बंधुओं, नितिन और चेतन की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया था. इस निर्देश से सेबी द्वारा उनकी वित्तीय गतिविधियों की जांच बंद करने के फैसले की सीधे न्यायिक समीक्षा होगी. कोर्ट की प्राथमिकता है कि पैसा भारत वापस आए ताकि बैंकों को इसका फायदा हो. यह बात इस तरह की वित्तीय जांचों के मूल्यांकन को प्रभावित करती है. संदेसरा बंधुओं के स्वामित्व वाली स्टर्लिंग ऑयल एक्सप्लोरेशन एंड एनर्जी प्रोडक्शन एक प्राइवेट कंपनी है. इसलिए इसके बाद पब्लिक मार्किट के डेटा जैसे P/E रेशियो या मार्केट कैपिटलाइजेशन लागू नहीं होते.
इस मामले में सीबीआई, ईडी, एसएफआईओ और आयकर विभाग ने अलग-अलग जांच की थी.
-भारत एक्सप्रेस
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